'अदालतों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं', CEC के खिलाफ प्रदर्शन पर बोले कपिल सिब्बल

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों और प्रशासन की कार्रवाई पर गहरी निराशा व्यक्त की है। शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिब्बल ने कहा कि उन्हें अब अदालतों से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने देश की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि देश किस दिशा में जा रहा है।
कपिल सिब्बल ने स्पष्ट किया कि केवल सुप्रीम कोर्ट ही वह एकमात्र संस्थान है जो संविधान की रक्षा कर सकता है। उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा, "हम अदालतों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। मुझे अब वहां जाने में कोई फायदा नजर नहीं आता और न ही कोई उम्मीद है।"
जंतर मंतर पर पाबंदियों और गिरफ्तारियों पर उठाए सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों पर सिब्बल ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि धारा 163 जैसे प्रावधान तब लागू किए जाते हैं जब मानव जीवन को खतरा हो या हिंसा की आशंका हो। सिब्बल ने सवाल किया कि जब यह प्रदर्शन पहले से तय था, तो आखिर किसे खतरा था? उन्होंने आरोप लगाया कि खतरा समाज को नहीं, बल्कि प्रशासन को है, और प्रशासन अपनी सुरक्षा के लिए इन पाबंदियों का सहारा ले रहा है।
सिब्बल ने प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों को बिना किसी स्पष्ट धारा के गिरफ्तार कर अज्ञात स्थानों पर रखा जा रहा है और उनके परिवारों को अंधेरे में रखा जा रहा है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं अभिजीत डिपके और आशुतोष रंका की विमान से ही हिरासत में लिए जाने का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या शांतिपूर्ण विरोध करना इतना बड़ा अपराध है?
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष को डर है कि अगर देशभर से लोग इकट्ठा होकर शांतिपूर्ण नारे भी लगाएंगे, तो देश देखेगा कि जनता नाराज है। इससे ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों के इस्तीफे की नौबत आ सकती है, इसलिए उनकी सुरक्षा के नाम पर यह सब किया जा रहा है। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर मंतर की ओर कूच करने की कोशिश कर रहे करीब 1,000 प्रदर्शनकारियों को अब तक हिरासत में लिया गया है।