दिल्ली में कपिल मिश्रा का बड़ा बयान, 'मेंटल नक्सलवाद' के खिलाफ वैचारिक लड़ाई की जरूरत

दिल्ली के द अशोक होटल में बुधवार, 26 अगस्त को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शीर्षक 'प्रबुद्ध संगोष्ठी' और पारिवारिक मिलन था। दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक नाटक 'जानता राजा' के संबंध में चर्चा की गई। यह कार्यक्रम आरएसएस के सह-सरकारवाह डॉ. कृष्ण गोपाल के मार्गदर्शन में हुआ।
दिल्ली के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने शारीरिक नक्सलियों के खिलाफ सफलता हासिल की है। नागरिकों को अपनी आवाज़ और कलम का उपयोग करके 'मेंटल नक्सलवादिता' के खिलाफ सामूहिक रूप से मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के दौर से गुजर रहा है।
मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि मुगलों के जाने के बाद भी 'मुगलई मानसिकता' बनी हुई है। उन्होंने युवा पीढ़ी को भ्रमित करने वालों को जवाब देने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को कमजोर करने वाली मानसिकता के खिलाफ वैचारिक जागरूकता बढ़ानी होगी। समाज को अपनी जड़ों, आस्था, परिवार और राष्ट्रीय नायकों से जोड़ना जरूरी है।
कार्यक्रम में सनातन धर्म के दर्शन पर भी बात की गई। कपिल मिश्रा ने कहा कि मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा के समान है। उन्होंने दिव्य प्रेम सेवा मिशन की सामाजिक सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद के दूधेश्वर महादेव मंदिर का छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से ऐतिहासिक संबंध है। ऐसे इतिहास को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
कपिल मिश्रा ने युवाओं और छात्रों से 'जानता राजा' जैसे ऐतिहासिक नाटक देखने की अपील की। उन्होंने 'सांस्कृतिक मार्क्सवाद' के प्रति चेतावनी दी। यदि युवा अपने परिवार और संस्कृति से कट जाते हैं, तो समाज की नींव कमजोर हो सकती है। अंत में उन्होंने मिशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम, मनोज कुमार और देश भर से आए मेहमानों का धन्यवाद किया।