IMC 2026: 'सरकार अब रेगुलेटर नहीं बल्कि पार्टनर है', ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बदला टेलीकॉम का नजरिया

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के दौरान टेलीकॉम सेक्टर में सरकार की बदलती भूमिका पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब सरकार केवल नियमों को लागू करने वाले 'रेगुलेटर' की भूमिका में नहीं है, बल्कि वह एक 'फैसिलिटेटर' और पार्टनर के तौर पर काम कर रही है। सिंधिया का मानना है कि टेलीकॉम इकोसिस्टम की असली सफलता तभी संभव है जब सरकार और इंडस्ट्री के सभी हितधारक एक समान स्तर पर मिलकर काम करें।
इस मौके पर सिंधिया ने एयरटेल एरिना का दौरा किया, जहां भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक और चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने उन्हें क्लाउड, डेटा सेंटर और सिक्योरिटी सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मंत्री ने जोर देकर कहा कि नेटवर्क उपकरण निर्माताओं, फाइबर निर्माताओं, टेलीकॉम ऑपरेटरों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) से लेकर एआई (AI) जैसे प्लेटफॉर्म्स तक, सभी इस इकोसिस्टम का हिस्सा हैं और सबकी तरक्की एक-दूसरे से जुड़ी है।
'राउंड टेबल' की सोच और नया टेलीकॉम एक्ट
पार्टनरशिप के विजन को समझाते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को इंडस्ट्री के साथ 'आयताकार' (Rectangular) टेबल के बजाय 'गोल मेज' (Round Table) पर बैठना चाहिए, क्योंकि गोल मेज पर कोई ऊपर या नीचे नहीं होता और साझेदारी की भावना मजबूत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री को टेबल के सिरहाने बैठने के बजाय बीच में बैठना चाहिए ताकि वह एक पार्टनर की भूमिका निभा सके।
सिंधिया ने पिछले कुछ वर्षों में हुए बदलावों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भारत 1885 के पुराने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के सहारे चल रहा था, जो लगभग 140 साल पुराना था। इस पुराने ढांचे को बदलकर 2023 में नया टेलीकम्युनिकेशन एक्ट लाया गया, जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस नए कानून ने रेगुलेटरी ढांचे को सरल बनाया है और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए पारदर्शिता बढ़ाई है।
भारत की डिजिटल प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि देश में प्रति यूजर मासिक डेटा उपयोग अब 6 GB तक पहुंच गया है, जो दुनिया की कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी केवल मंजिल नहीं है, बल्कि असली मकसद मानवीय क्षमताओं का विस्तार करना है। इसी दिशा में आधार और UPI जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने देश को सशक्त बनाया है, जहां UPI के जरिए हर महीने करीब 20 अरब ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।