अदालतों को राजनीतिक हथियार न बनाएं, विपक्ष सरकार पर हमला करने के लिए इनका इस्तेमाल न करे: जस्टिस संजय किशन कौल
पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा कि अदालतों का इस्तेमाल विपक्ष द्वारा सरकार पर हमला करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने न्यायपालिका की भूमिका को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने आगाह किया है कि अदालतों का इस्तेमाल राजनीतिक मंच के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, न्यायपालिका का उद्देश्य यह नहीं है कि इसका उपयोग विपक्ष द्वारा सत्ताधारी दल पर "गोलांदाजी" करने के लिए किया जाए।
जस्टिस कौल ने स्पष्ट किया कि अदालती हस्तक्षेप हमेशा विषयपरक होता है और इसे केवल कानूनी मसलों तक ही सीमित रखना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अतीत में कई बार उन्होंने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी है कि राजनीतिक मुद्दों को अदालत के बाहर ले जाएं और उन्हें किसी अन्य मंच पर सुलझाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि किसी मामले में कानूनी सवाल खड़ा होता है, तभी अदालत को उसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।
ध्रुवीकरण और न्यायपालिका पर दबाव
वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस कौल ने कहा कि समाज इस समय काफी बंटा हुआ है। उन्होंने "भक्त" और "हेटर" जैसी मानसिकताओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह का चरम ध्रुवीकरण न्यायाधीशों के लिए एक कठिन वातावरण पैदा करता है। जब जनता का नजरिया इतना कट्टर हो जाता है, तो वे यह समझने में असमर्थ होते हैं कि अदालत द्वारा सरकार के पक्ष या विपक्ष में दिया गया फैसला उसकी कार्यात्मक ड्यूटी का हिस्सा है, न कि किसी राजनीतिक पूर्वाग्रह का परिणाम।
उन्होंने आगे कहा कि संविधान निर्माताओं ने अदालतों को 'चेक एंड बैलेंस' (संतुलन और नियंत्रण) के रूप में देखा था। उन्होंने अपील की कि बीच का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए और यह स्वीकार करना चाहिए कि सरकार कुछ अच्छे काम करती है और कुछ मामलों में अदालत उससे असहमत हो सकती है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 'INDIA' गठबंधन ने चुनाव आयोग (ECI) के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभ्यास के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। राहुल गांधी सहित गठबंधन के नेताओं ने इस प्रक्रिया के न्यायिक ऑडिट और हटाए गए मतदाताओं के डेटा के खुलासे की मांग की है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR से जुड़े सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।