'प्रक्रिया ही सजा बन गई है': उमर खालिद और शरजील इमाम मामले पर बोले जस्टिस संजय किशन कौल

पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा कि देश में ट्रायल से पहले की लंबी हिरासत खुद एक सजा बन गई है। उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले पर दी प्रतिक्रिया।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsNational
'प्रक्रिया ही सजा बन गई है': उमर खालिद और शरजील इमाम मामले पर बोले जस्टिस संजय किशन कौल

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने देश की न्यायिक प्रणाली में जमानत की प्रक्रिया और ट्रायल से पहले की लंबी हिरासत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के संदर्भ में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में दोषसिद्धि या बरी होने से पहले का समय ही एक तरह की सजा बन चुका है। उनके अनुसार, जब कानूनी प्रक्रिया इतनी लंबी खिंच जाती है, तो वह अपने आप में एक दंड के समान हो जाती है।

एक इंटरव्यू के दौरान जस्टिस कौल ने स्पष्ट किया कि उनका जमानत के प्रति नजरिया काफी उदार रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सजा केवल दोषसिद्धि (conviction) के बाद होनी चाहिए, न कि जमानत याचिका पर विचार के दौरान। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि जमानत सजा नहीं हो सकती। दुर्भाग्य से, हमारे सिस्टम में मुकदमे की प्रक्रिया ही सजा बन जाती है।"

जमानत के नियमों और कानूनों पर विचार

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जस्टिस कौल ने बताया कि उन्होंने और जस्टिस सुंदरेश ने अपने कार्यकाल के दौरान जमानत के मानदंडों को स्पष्ट करने की कोशिश की थी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हिरासत में रहने की आवश्यकता वास्तव में है या नहीं। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर जमानत ही नियम (norm) होनी चाहिए, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ विशेष कानून ऐसे हैं जो कुछ मामलों में जमानत पर रोक लगाते हैं।

गौरतलब है कि जस्टिस संजय किशन कौल और जय विनायक ओझा द्वारा लिखित एक संस्मरण "विदाउट फियर और फेवर" (Without Fear or Favour) जल्द ही 31 अक्टूबर को रिलीज होने जा रहा है।

यह पूरा मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की जान गई थी। उमर खालिद और शरजील इमाम पर यूएपीए (UAPA) के तहत एक बड़ी साजिश रचने का आरोप है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें अदालत ने कहा था कि दोनों आरोपियों की स्थिति और उनके खिलाफ सबूत अलग-अलग स्तर के हैं।

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