चुनाव आयोग के खिलाफ शोर मचा रहे हैं वो दल जो जीत नहीं पाए: जस्टिस शिव नारायण ढिंगरा

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शिव नारायण ढिंगरा ने चुनाव आयोग (ECI) के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे विपक्षी 'INDIA' गठबंधन पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पूरा शोर आम मतदाताओं द्वारा नहीं, बल्कि उन राजनीतिक दलों द्वारा मचाया जा रहा है जो चुनाव जीतने में नाकाम रहे। जस्टिस ढिंगरा ने इन विरोध प्रदर्शनों को वास्तविक चिंता के बजाय एक राजनीतिक रूप से प्रेरित 'मीडिया तमाशा' करार दिया है।
विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए 'बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने' के आरोपों को खारिज करते हुए पूर्व जज ने कहा कि मतदाता सूची का गहन संशोधन चुनाव आयोग की एक अनिवार्य वैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने तर्क दिया कि संसद ने आयोग को यह जनादेश दिया है कि वह हर 10 साल में चुनावी सूची को संशोधित करे, मृतकों के नाम हटाए और नए मतदाताओं को जोड़े। उनके अनुसार, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी गैर-नागरिक भारत में मतदान न कर सके।
'शिकायत का समाधान मौजूद है, फिर भी ड्रामा हो रहा है'
जस्टिस ढिंगरा ने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो उसके लिए कानूनी उपचार और शिकायत करने का रास्ता खुला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समाधान मौजूद है, तो पूरी SIR प्रक्रिया की ही निंदा करना केवल चुनाव आयोग के कामकाज में बाधा डालने की कोशिश है।
विपक्षी नेताओं और चुनाव आयोग के बीच मुलाकात को लेकर हुए विवाद पर उन्होंने कहा कि इस पूरे आंदोलन का मकसद समस्याओं का समाधान ढूंढना नहीं, बल्कि केवल दृश्यता (visibility) बढ़ाना और ड्रामा करना है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जब चुनाव आयोग ने 300 सांसदों के बजाय एक छोटे प्रतिनिधिमंडल को बुलाने की बात कही, तो विपक्षी गठबंधन ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
पूर्व न्यायाधीश ने आगे कहा कि सांसदों द्वारा चुनाव आयोग को सीधे अपॉइंटमेंट के लिए अनुरोध करने के बजाय पुलिस के माध्यम से सूचना देना और फिर आयोग को संसद एनेक्स में बुलाना तर्कसंगत नहीं है। आयोग का अपना कार्यालय और कॉन्फ्रेंस रूम है, जहां जाकर मुलाकात की जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल संख्या बल और नारेबाजी के जरिए आयोग को दबाना चाहता था, जबकि आयोग ने केवल ज्ञापन स्वीकार कर स्थिति को संभालने की कोशिश की, जिसे विपक्ष ने भी ठुकरा दिया।