'खुद में एक संस्थान थे केदार नाथ साहनी', 100वीं जयंती पर जेपी नड्डा ने दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने दिग्गज नेता केदार नाथ साहनी की 100वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए उनके राजनीतिक विजन और सादगी की सराहना की।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने दिग्गज नेता केदार नाथ साहनी की 100वीं जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। नड्डा ने उन्हें एक ऐसा व्यक्तित्व बताया जिनका राजनीतिक विजन और समर्पण अद्वितीय था। उन्होंने कहा कि केदार नाथ साहनी जी का जीवन और उनकी सोच किसी स्कूल से कम नहीं थी, जिससे आज की पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है।
मीडिया से बात करते हुए जेपी नड्डा ने बताया कि साहनी जी ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन वे कभी भी सत्ता के मोह में नहीं फंसे। नड्डा ने उनके सरल स्वभाव और विचारधारा के प्रति अटूट निष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि वे गोवा और सिक्किम के राज्यपाल जैसे बड़े पदों पर रहे, फिर भी वे हमेशा पार्टी और अपनी विचारधारा के प्रति समर्पित रहे।
नेतृत्व और सादगी की मिसाल
जेपी नड्डा ने केदार नाथ साहनी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। नड्डा के शब्दों में, "साहनी जी भीड़ में भी अपनी अलग पहचान रखते थे। वे कभी किसी के अनुयायी नहीं रहे, बल्कि हमेशा एक मार्गदर्शक और नेता की भूमिका में रहे। उनका पूरा जीवन और जीवनशैली अपने आप में एक संस्थान थी।"
केदार नाथ साहनी का सफर काफी प्रेरणादायक रहा। वे आरएसएस के प्रचारक और भाजपा के वरिष्ठ नेता थे। उन्होंने 1995 से 1998 तक दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके अलावा, उन्होंने साल 2001-02 में सिक्किम और 2002-04 में गोवा के राज्यपाल के तौर पर अपनी सेवाएं दीं।
मूल रूप से रावलपिंडी में जन्मे साहनी जी का परिवार विभाजन के बाद दिल्ली में बस गया था। उन्होंने पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए कड़े प्रयास किए और दिल्ली में जनसंघ के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बनकर उभरे।