नशा मुक्त भारत: जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य कर्मियों के लिए लॉन्च किया ड्रग डी-एडिक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ड्रग डी-एडिक्शन क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया ताकि भारत को नशा मुक्त बनाया जा सके।

Kittu Kumari26 October 20262 min read0 viewsNational
नशा मुक्त भारत: जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य कर्मियों के लिए लॉन्च किया ड्रग डी-एडिक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम

देश को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-1 में चिकित्सा और संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए 'क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम' (Capacity Building Training Programme) की शुरुआत की। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ड्रग डी-एडिक्शन सेवाओं में लगे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को आधुनिक प्रशिक्षण देना है ताकि वे नशे की लत से जूझ रहे लोगों का बेहतर इलाज कर सकें।

इस कार्यक्रम के दौरान जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या से निपटने के लिए 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' यानी सरकार के सभी विभागों के सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पहले के प्रयासों में तालमेल की कमी थी, जिससे सेवाओं में कुछ अंतराल रह गया था, जिसे अब दूर किया जाएगा। यह पूरी पहल 'नारकोटिक कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029' का एक अहम हिस्सा है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जून 2026 में पेश किया था। इस विजन का लक्ष्य साल 2029 तक भारत को पूरी तरह 'नशा मुक्त भारत' बनाना है।

10 हजार स्वास्थ्य कर्मियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

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इस महत्वाकांक्षी रोडमैप के तहत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को मार्च 2029 तक कुल 10,000 सेवा प्रदाताओं की क्षमता विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए एक विस्तृत शेड्यूल तैयार किया गया है:

  • वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2,000 प्रदाताओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • साल 2027-28 में 3,000 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • साल 2028-29 तक शेष 5,000 कर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।

स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रोग्राम का मुख्य फोकस मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ को इस काबिल बनाना है कि वे युवाओं को नशे की लत से बचा सकें और उनका सही प्रबंधन कर सकें। इस ट्रेनिंग की जिम्मेदारी देश के छह प्रमुख संस्थानों को दी गई है, जिनमें एम्स दिल्ली (NDDTC), निमहंस बेंगलुरु, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, रांची का सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल दिल्ली और एम्स भुवनेश्वर शामिल हैं।

इसी मौके पर जेपी नड्डा ने "मैनेजमेंट ऑफ एडिक्टिव डिसऑर्डर्स: ए फिजिशियन मैनुअल" के दूसरे संस्करण को भी जारी किया। यह पूरा कार्यक्रम 'नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन' (NAPDDR) के साथ मिलकर काम करेगा, जिससे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डॉक्टरों, नर्सों, काउंसलर्स और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स को व्यापक प्रशिक्षण मिल सकेगा।

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