जंतर मंतर पर महिला पत्रकारों से बदसलूकी, संसद स्ट्रीट थाने पर भारी प्रदर्शन

दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी और यौन उत्पीड़न का मामला गरमाता जा रहा है। इस घटना के बाद सैकड़ों मीडियाकर्मी संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पत्रकारों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ न केवल शारीरिक हिंसा की, बल्कि अभद्र व्यवहार भी किया।
यह पूरा विवाद 2 और 3 अक्टूबर 2026 को तब शुरू हुआ जब ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया जा रहा था। आरोप है कि इस दौरान ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों ने महिला पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया। एक महिला पत्रकार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें गलत तरीके से छुआ। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिसकर्मियों को महिला पत्रकारों को घसीटते और धक्का देते हुए देखा जा सकता है।
FIR दर्ज करने से पुलिस का इनकार, भड़के मीडियाकर्मी
गुस्साए पत्रकारों का कहना है कि जब वे इस मामले की शिकायत लेकर संसद स्ट्रीट थाने पहुंचे, तो पुलिस ने FIR दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया। आरोप है कि पुलिस उन्हें कानूनी प्रक्रिया का हवाला देकर घर वापस जाने की सलाह दे रही है, जबकि मामला गंभीर है। प्रदर्शन कर रहे मीडियाकर्मियों ने पुलिसकर्मियों को "वर्दी में गुंडे" तक कह डाला है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) के मामले में FIR दर्ज न करना दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आधार बन सकता है। ऐसे हालात में पीड़ित पत्रकार अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (SP या DSP) से शिकायत करने या मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करने जैसे कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
इस घटना ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। चूंकि दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए लोग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं। मीडिया जगत और नागरिक समाज अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।