दिल्ली: पुलिस की बदसलूकी के खिलाफ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर पत्रकारों का प्रदर्शन

Kittu Kumari3 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली: पुलिस की बदसलूकी के खिलाफ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर पत्रकारों का प्रदर्शन

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर पुलिस और मीडियाकर्मियों के बीच तनाव बढ़ गया है। 3 अक्टूबर 2026 को बड़ी संख्या में पत्रकार नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हुए। यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली पुलिस के अधिकारियों द्वारा मीडिया कर्मियों के साथ कथित तौर पर किए गए दुर्व्यवहार और बदसलूकी के खिलाफ था। पत्रकारों का आरोप है कि ड्यूटी के दौरान उनके साथ न केवल अभद्रता की गई, बल्कि शारीरिक हमला भी हुआ।

पूरा मामला जंतर मंतर पर शुरू हुआ, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहा था। वहां रिपोर्टिंग कर रही दो महिला पत्रकारों ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर उत्पीड़न और शारीरिक हाथापाई का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के बाद मीडिया जगत में भारी आक्रोश है और प्रदर्शनकारी इस मामले में तुरंत जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

जंतर मंतर पर बढ़ा तनाव, धारा 163 लागू

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जंतर मंतर पर स्थिति तब और बिगड़ गई जब पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों और एक पत्रकार को हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी गलत व्यवहार किया गया और उनके कैमरे जबरन छीन लिए गए। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी महिला प्रदर्शनकारी पर लाठी चलाते दिख रहे हैं।

इससे ठीक एक दिन पहले, 2 अक्टूबर को भी CJP से जुड़े 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद तीन अलग-अलग FIR दर्ज की गई थीं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि 3 अक्टूबर के प्रदर्शनों के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी और न ही इसकी कोई पूर्व सूचना मिली थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात सुरक्षा के लिए नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 लागू की गई है, जिसके तहत बिना अनुमति के सभाओं और जुलूसों पर रोक है।

गौरतलब है कि पत्रकारों के साथ पुलिसिया कार्रवाई की यह कोई पहली घटना नहीं है। सितंबर 2026 में भी '4 पीएम न्यूज नेटवर्क' की पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान ने साकेत पुलिस स्टेशन में हिरासत के दौरान मारपीट और भेदभावपूर्ण व्यवहार के आरोप लगाए थे। हालांकि, उस समय दिल्ली पुलिस ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा था कि पत्रकारों ने VVIP रूट में बाधा डाली थी।

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