मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन: दिल्ली में 35 पत्रकार हिरासत में

राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 48 घंटों के भीतर दिल्ली में कम से कम 35 मीडिया कर्मियों को हिरासत में लिया गया। यह पूरा विवाद मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के बीच शुरू हुआ, जहां कवरेज कर रहे पत्रकारों और पुलिस के बीच टकराव देखने को मिला।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने जानकारी दी है कि केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पुणे और अहमदाबाद में भी पत्रकारों को निशाना बनाया गया, जिससे कुल हिरासत में लिए गए मीडिया कर्मियों की संख्या 38 तक पहुंच गई। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि इन लोगों को पुलिस ड्यूटी में बाधा डालने के कारण रोका गया था। यह घटना मुख्य रूप से 10 और 11 अक्टूबर 2026 को घटी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि 11 अक्टूबर को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके काम में कोई बाधा नहीं डाली जानी चाहिए। इसके बावजूद हिरासत की खबरें आती रहीं। इस मामले में 'फ्री स्पीच कलेक्टिव' ने 12 अक्टूबर को अदालत में अवमानना याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने जानबूझकर कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी की। अब सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर को इस मामले की दोबारा समीक्षा करेगा।
इस घटनाक्रम के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और इंडियन विमेन प्रेस कॉर्प्स जैसे संगठनों ने पुलिस की कड़ी निंदा की है। आरोपों में कहा गया है कि पत्रकारों के साथ मारपीट की गई, उनके फोन जब्त किए गए और तीन महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि पत्रकारों को वैध पहचान पत्र दिखाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। पुलिस ने 12 अक्टूबर को एक एडवाइजरी जारी कर इन नियमों को फिर से दोहराया। इसके साथ ही, पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से 11 पोस्ट और वीडियो हटाने की मांग की, जिन्हें सार्वजनिक व्यवस्था के लिए भड़काऊ माना गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर CPJ के कुणाल मजुमदार ने इसे भारतीय लोकतांत्रिक परंपराओं पर एक 'धब्बा' बताया है। वहीं, ह्यूमन राइट्स वॉच और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई और प्रेस की आजादी का सम्मान करने की अपील की है। बता दें कि इन प्रदर्शनों में 'कॉकरोच जनता पार्टी' और कई छात्र संगठन शामिल थे।