ACP पर यौन शोषण का आरोप: जातिगत टिप्पणी की FIR रद्द करने दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची महिला पत्रकार

दिल्ली की एक स्वतंत्र महिला पत्रकार ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एक एफआईआर (FIR) को रद्द करने की मांग की है, जिसमें उन पर एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ जातिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। पत्रकार रोजी का दावा है कि यह पूरा मामला उनके द्वारा एक एसीपी (ACP) पर लगाए गए यौन शोषण के आरोपों के जवाब में 'बदले' की भावना से दर्ज कराया गया है।
पूरी घटना की शुरुआत 3 अक्टूबर को हुई, जब रोजी बूटा सिंह चौक पर एक विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान एसीपी विवेक भगत ने उनके साथ यौन शोषण किया। पत्रकार का कहना है कि उन्होंने तुरंत इस घटना का विरोध किया और उसी दिन शाम करीब 6:30 बजे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी, जिसमें रोजी ने पूरा सहयोग भी किया और 11 अक्टूबर को घटना स्थल की पहचान भी कराई।
जांच में सहयोग के बावजूद दर्ज हुई FIR
हैरानी की बात यह है कि जब रोजी की शिकायत पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तब अचानक 13 अक्टूबर की रात करीब 10:26 बजे उनके खिलाफ एक मामला दर्ज कर लिया गया। एसीपी विवेक भगत ने उन पर जातिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। रोजी का तर्क है कि यह कार्रवाई उन्हें डराने-धमकाने और अपने यौन शोषण के मामले को वापस लेने के लिए मजबूर करने की एक साजिश है।
अपनी याचिका में पत्रकार ने कुछ गंभीर बातें और कही हैं:
- उन्होंने दावा किया कि वर्दीधारी और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और पड़ोसियों पर दबाव डाला कि वे उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए मनाएं।
- उन्होंने स्पष्ट रूप से जातिगत टिप्पणी करने के आरोपों से इनकार किया है।
- उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि वह खुद खासी जनजाति के लिंगदोह समुदाय से आती हैं, जिसे अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
रोजी ने अदालत से मांग की है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए और जब तक मामला लंबित है, उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की जाए। उन्होंने 3 अक्टूबर को दोपहर 3 से 3:10 बजे के बीच बूटा सिंह चौक के पास के सीसीटीवी फुटेज और पुलिस बॉडी-कैम रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने की भी मांग की है। एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।