जंतर मंतर पर बवाल: सीनियर जर्नलिस्ट प्रज्ञा मिश्रा और कैमरामैन के साथ दिल्ली पुलिस की बदसलूकी का आरोप

देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर एक बार फिर पुलिस और मीडिया के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। आरोप है कि 10 अक्टूबर 2026 को एक प्रदर्शन की कवरेज के दौरान दिल्ली पुलिस ने सीनियर जर्नलिस्ट प्रज्ञा मिश्रा और उनके साथ मौजूद कैमरामैन के साथ शारीरिक अभद्रता की और उन्हें काम करने से रोका। इस घटना ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की आजादी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह पूरी घटना कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान हुई। बताया जा रहा है कि पुलिस कर्मियों ने कवरेज को रोकने के लिए मीडिया कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की। इस हंगामे में केवल प्रज्ञा मिश्रा ही नहीं, बल्कि एनॉक्स न्यूज के कैमरामैन उत्पल झा सहित अन्य मीडिया कर्मियों को भी हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई हैं।
प्रदर्शन और पुलिस की सख्त कार्रवाई
जंतर मंतर पर हुए इस प्रदर्शन में पुलिस काफी सख्त नजर आई। अधिकारियों के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए यह कदम जरूरी थे। इस दौरान पुलिस ने धारा 163 के उल्लंघन, मारपीट और पत्थरबाजी जैसे गंभीर आरोपों में 20 से ज्यादा एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं। हालांकि, पुलिस की इस कार्रवाई के बीच पत्रकारों के साथ हुई बदसलूकी ने विवाद को बढ़ा दिया है।
हैरानी की बात यह है कि दिल्ली में पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर यह कोई पहली शिकायत नहीं है। इससे पहले 4 अक्टूबर को भी महिला पत्रकारों ने जंतर मंतर पर पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे, जिसकी जांच अब क्राइम ब्रांच कर रही है।
इन घटनाओं के बाद 5 और 6 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने मीडिया के लिए नई गाइडलाइन्स भी जारी की थीं, जिसमें पत्रकारों को अपना आईडी कार्ड दिखाने और पुलिस ऑपरेशन से एक निश्चित दूरी बनाए रखने को कहा गया था। अब प्रज्ञा मिश्रा के साथ हुई इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की जवाबदेही और पत्रकारों की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है।