JNU भूख हड़ताल: सांसद जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति मुर्मू से की हस्तक्षेप की मांग

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्रों द्वारा की जा रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अब एक गंभीर मोड़ ले चुकी है। इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सीपीआई(एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक औपचारिक पत्र लिखा है। चूंकि राष्ट्रपति जेएनयू की 'विजिटर' भी हैं, इसलिए ब्रिटास ने उनसे इस संकटपूर्ण स्थिति में दखल देने की अपील की है ताकि छात्रों की समस्याओं का समाधान निकल सके।
बता दें कि जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) और अन्य छात्रों के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन 3 अक्टूबर से शुरू हुआ था। रविवार, 18 अक्टूबर तक यह हड़ताल अपने 16वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। सांसद जॉन ब्रिटास ने अपने पत्र में इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि भूख हड़ताल के कारण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट आ रही है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इन मुद्दों को सुलझाने में नाकाम रहा है।
छात्रों की मुख्य मांगें और प्रशासन पर आरोप
सांसद ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में छात्रों की कई महत्वपूर्ण मांगों का जिक्र किया है। प्रदर्शनकारी छात्र मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रशासन से कार्रवाई चाहते हैं:
- रस्टिकेशन का खात्मा: निर्वाचित छात्र संघ सदस्यों के खिलाफ जारी किए गए रस्टिकेशन (निष्कासन) आदेशों को तुरंत वापस लिया जाए। पत्र में उल्लेख है कि पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष सहित कई निर्वाचित प्रतिनिधियों को पिछले करीब आठ महीनों से कैंपस में प्रवेश नहीं मिला है, जिससे छात्र शासन प्रभावित हुआ है।
- CPO मैनुअल में बदलाव: चीफ प्रॉक्टर ऑफिस (CPO) मैनुअल के उन विवादास्पद प्रावधानों को हटाने की मांग की गई है, जिनके जरिए भारी जुर्माना लगाया जाता है और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। छात्रों का आरोप है कि ये नियम शांतिपूर्ण विरोध की आवाज को दबाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
- कैंपस सुविधाएं और न्याय: इसके अलावा, कैंपस की बुनियादी सुविधाओं, जेंडर जस्टिस (लैंगिक न्याय), समान अवसर और प्रवेश प्रक्रियाओं से जुड़ी शिकायतों को दूर करने की मांग की गई है।
जॉन ब्रिटास ने जोर देकर कहा कि शैक्षणिक समुदाय की भलाई और कैंपस में शांति बहाल करने के लिए राष्ट्रपति का हस्तक्षेप बेहद जरूरी है, ताकि इस गतिरोध को जल्द से जल्द खत्म किया जा सके।