JNU में रिक्रूटमेंट स्कैम के आरोपों के बाद VC को हटाने की मांग, टीचर्स और स्टूडेंट्स ने खोला मोर्चा

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में रिक्रूटमेंट स्कैम के आरोपों के बाद विवाद गहरा गया है। Jawaharlal Nehru University Teachers' Association (JNUTA) और Students' Union (JNUSU) ने वाइस-चांसलर Santishree Dhulipudi Pandit को तुरंत पद से हटाने की औपचारिक मांग की है।
- 13 अगस्त 2026 को Press Club of India में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
- टीचर्स और स्टूडेंट्स ने VC पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
- Faculty appointments में UGC eligibility criteria के उल्लंघन का दावा किया गया है।
स्कैम के आरोप और प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि Vice-Chancellor के कार्यकाल के दौरान की गई faculty appointments में अनिवार्य University Grants Commission (UGC) eligibility criteria का उल्लंघन किया गया है। (Source: ANI) ये दावे 'The Reporters' Collective' की एक investigative report के जरिए सामने आए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, screening committees द्वारा खारिज किए गए उम्मीदवारों को बाद में Internal Quality Assurance Cell (IQAC) द्वारा Vice-Chancellor की देखरेख में फिर से बहाल किया गया।
नॉन-टीचिंग नियुक्तियों में भ्रष्टाचार और आगे की कार्रवाई
Faculty irregularities के अलावा, जिसमें कई associate और assistant professors की improper appointment शामिल हैं, stakeholders ने non-teaching appointments और contractual practices में corruption को लेकर भी चिंता जताई है।
Rajya Sabha members ने इन नियुक्तियों पर university's Executive Council members के विरोध को नजरअंदाज किए जाने की रिपोर्टों का हवाला देते हुए एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच (independent, time-bound inquiry) की मांग का समर्थन किया है।
मार्च 2026 के campus referendum में 90% से अधिक छात्रों ने Vice-Chancellor को हटाने के पक्ष में वोट किया था। इसके बाद Ministry of Education और President of India को formal charter of demands सौंपा गया है, जिससे administration पर दबाव बढ़ गया है।