JNU VC ने फैकल्टी भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों को नकारा, बताया राजनीति से प्रेरित अभियान

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की Vice-Chancellor शांतिश्री धूलुपूड़ी पंडित ने फैकल्टी recruitment में गड़बड़ी के सभी आरोपों को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को बिना किसी ठोस आधार वाला 'malicious campaign' बताया है। इस बढ़ते दबाव के बीच JNU administration ने अपने पक्ष में आंकड़े पेश करते हुए कहा कि फरवरी 2022 से अब तक 400 से ज्यादा faculty interviews किए गए हैं और 200 से अधिक positions पर नियुक्तियां की गई हैं। प्रशासन ने दावा किया कि इनमें से 70% appointments reserved और marginalized categories से की गई हैं। प्रशासन का यह भी कहना है कि selection process में domain experts और Visitor nominees शामिल होते हैं और सभी strict guidelines का पूरा पालन किया जाता है।
JNU शिक्षक और छात्र संघ की इस्तीफे की मांग
दूसरी ओर, JNU Students' Union (JNUSU) और JNU Teachers' Association (JNUTA) लगातार Vice-Chancellor के resignation और एक independent inquiry की demand कर रहे हैं। यूनियन का आरोप है कि कम से कम सात faculty appointments में University Grants Commission (UGC) के norms और university statutes का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने Internal Quality Assurance Cell (IQAC) द्वारा manipulation किए जाने का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा, आलोचकों ने VC पंडित के Pune University के कार्यकाल के दौरान हुई एक past inquiry को लेकर भी चिंता जताई है।
राजनीतिक दलों की एंट्री और प्रशासन का पक्ष
जब Congress MP Pawan Khera जैसे political figures भी इस विवाद में शामिल हो गए हैं, तब administration का कहना है कि यह पूरा backlash हालिया legal developments के बाद institution और central government को नीचा दिखाने की एक politically motivated कोशिश है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि JNU में सभी नियुक्तियां पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत की गई हैं।