JNU प्रशासन से समझौता: 17 दिनों की भूख हड़ताल खत्म, 5 छात्रों की रस्टिकेशन वापस

Kittu Kumari20 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
JNU प्रशासन से समझौता: 17 दिनों की भूख हड़ताल खत्म, 5 छात्रों की रस्टिकेशन वापस

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) कैंपस में पिछले 17 दिनों से जारी तनाव अब खत्म हो गया है। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ एक लिखित समझौते के बाद अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दी। यह विरोध प्रदर्शन 3 अक्टूबर से शुरू हुआ था, जिसमें छात्र अनुशासनिक कार्रवाई, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे गंभीर मुद्दों पर अड़े थे।

छात्रों और यूनिवर्सिटी कमेटी के बीच 9, 14 और 19 अक्टूबर को कई दौर की बैठकें हुईं, जिसके बाद यह सहमति बनी। इस समझौते के तहत यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पांच छात्रों की रस्टिकेशन (निष्कासन) वापस ले ली है। इनमें JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं। हालांकि, इन छात्रों को अपना जुर्माना तुरंत भरने की सलाह दी गई है।

प्रशासन ने मानी मांगें, FIR और जांच भी होंगी खत्म

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समझौते की शर्तें केवल रस्टिकेशन तक सीमित नहीं हैं। प्रशासन ने छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेने और UGC नियमों, हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर व रस्टिकेशन के विरोध में शुरू की गई प्रोक्टोरियल जांचों को समाप्त करने का फैसला किया है। साथ ही, चीफ प्रॉक्टर ऑफिस के मैनुअल से विवादित क्लॉज हटाने के लिए एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें JNUSU के पदाधिकारी और निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे।

इसके अलावा, हॉस्टल रिजर्वेशन और JNU प्रवेश परीक्षा (JNUEE) की प्रक्रिया की निगरानी के लिए भी JNUSU की भागीदारी वाली समितियां गठित की जाएंगी। कैंपस की सुविधाओं को सुधारने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाने का वादा किया है:

  • तप्ती और माही-मांडवी हॉस्टल्स के साथ-साथ टेफलास कैफेटेरिया का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जाएगा।
  • दो हफ्ते के भीतर सभी हॉस्टल्स के गीजर चालू किए जाएंगे।
  • सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस (CSLG) में एक कैंटीन खोली जाएगी।
  • स्कूल लाइब्रेरी के समय को बढ़ाकर रात 9 बजे तक किया जाएगा।

इस पूरे विवाद के दौरान कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित और सोशल साइंस स्कूल के डीन प्रोफेसर विवेक कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, इससे पहले कुलपति ने छात्रों के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए हड़ताल खत्म करने की अपील की थी, जिसे छात्र संघ ने केवल 'दिखावा' करार दिया था। दूसरी ओर, प्रशासन ने इस बात पर चिंता जताई थी कि विरोध प्रदर्शन के दौरान करीब 20 लाख रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।

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