JNU भूख हड़ताल: प्रशासन ने छात्रों के साथ की दो दौर की बातचीत, स्वास्थ्य का रखा ख्याल

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में निर्वाचित JNUSU सदस्यों के निष्कासन (rustication) को रद्द करने की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल पर प्रशासन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ दो दौर की चर्चा की है और भूख हड़ताल पर बैठे सभी छात्रों, जिनमें निष्कासित छात्र भी शामिल हैं, को जरूरी चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।
प्रशासन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियुक्त एक समिति, जिसके प्रमुख सोशल साइंसेज स्कूल के डीन प्रोफेसर विवेक कुमार हैं, ने 9 अक्टूबर और 14 अक्टूबर को भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मुलाकात की। 9 अक्टूबर को कुलपति कार्यालय में हुई पहली बैठक चार घंटे से अधिक चली, जिसके बाद आश्वासन मिलने पर दो समूहों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया। हालांकि, कुछ समूह एक साथ बैठने को तैयार नहीं थे, इसलिए उनसे अलग-अलग चर्चा की गई। इसके बाद 14 अक्टूबर को शाम 5 बजे फिर से बैठक हुई, जिसमें कई घंटों तक बातचीत चली और यह तय हुआ कि छात्र भविष्य में दोबारा समिति से मिलेंगे।
स्वास्थ्य देखभाल और संपत्ति के नुकसान पर प्रशासन का तर्क
विश्वविद्यालय ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) प्रदर्शन की शुरुआत से ही रोजाना छात्रों के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं। मानवीय आधार पर निष्कासित छात्रों को भी दिन में दो बार मेडिकल चेकअप दिया जा रहा है। वहीं, प्रशासन ने निष्कासित छात्रों के खिलाफ अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि इन छात्रों ने करीब 20 लाख रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था।
प्रशासन का दावा है कि इन छात्रों ने प्रतिबंधों का उल्लंघन किया, कैंपस में अवैध रूप से रहे और जमानत की शर्तों को ताक पर रखकर राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। विश्वविद्यालय ने जोर देकर कहा कि यह संपत्ति भारत सरकार द्वारा दिए गए फंड से खरीदी गई थी, जो वास्तव में करदाताओं का पैसा है।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की। ब्रिटास ने 3 अक्टूबर से चल रही इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर चिंता जताते हुए छात्रों के गिरते स्वास्थ्य और प्रशासन की विफलता का मुद्दा उठाया। उन्होंने राष्ट्रपति से निष्कासन आदेशों को रद्द करने और छात्रों की लंबे समय से लंबित शिकायतों के समाधान की अपील की है।