JNU में PhD एडमिशन की आरक्षित सीटों में कमी का मामला, जांच के लिए कमेटी गठित

JNU ने PhD एडमिशन में SC, ST और PwBD सीटों की कथित कमी की जांच के लिए कमेटी बनाई है। छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया था।

Kittu Kumari2 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
JNU में PhD एडमिशन की आरक्षित सीटों में कमी का मामला, जांच के लिए कमेटी गठित

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए PhD प्रवेश प्रक्रिया में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwBD) उम्मीदवारों के लिए आरक्षित सीटों में कथित कमी के आरोपों की जांच के लिए एक पैनल बनाया है। यह कदम यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र संगठनों के भारी दबाव और विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया है।

SFI, BAPSA, AISA और JNUSU जैसे छात्र संगठनों का दावा है कि यूनिवर्सिटी के प्रॉस्पेक्टस में कुल 711 PhD सीटों के आवंटन में बड़ी गड़बड़ी हुई है। आरोपों के मुताबिक, ST श्रेणी के लिए 53 सीटों की जरूरत थी, लेकिन केवल 38 सीटें ही विज्ञापित की गईं, जिससे 15 सीटों की कमी दिखी। इसी तरह SC उम्मीदवारों के लिए 107 के मुकाबले सिर्फ 103 सीटें और PwBD श्रेणी के लिए 36 की जगह केवल 17 सीटें ही दिखाई गईं, जिसमें 19 सीटों का अंतर है।

'माइक्रो-यूनिट' फॉर्मूले पर उठे सवाल

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी 'माइक्रो-यूनिट' सीट आवंटन पद्धति का इस्तेमाल कर रही है। इस तरीके में आरक्षण का प्रतिशत कुल सीटों के बजाय अलग-अलग सेंटर्स पर लागू किया जाता है, जिसकी वजह से कई विषयों में आरक्षित श्रेणियों के लिए शून्य सीटें आवंटित हो जाती हैं। इस मुद्दे को लेकर BAPSA 24 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन धरना दे रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने हस्तक्षेप किया है। आयोग ने JNU को निर्देश दिया है कि वह या तो छूटी हुई आरक्षित सीटों को दोबारा अधिसूचित करे या वाइवा (viva voce) परीक्षा शुरू करने से पहले इसका औपचारिक स्पष्टीकरण दे। यूनिवर्सिटी प्रशासन को 2 नवंबर 2026 को NCSC के समक्ष पेश होना था। साथ ही, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और यूनिवर्सिटी के इक्वल अपॉर्चुनिटी सेल (EOC) को इसकी जांच करने का आदेश दिया है।

छात्र संगठनों की मांग है कि जब तक एक संशोधित और पारदर्शी एडमिशन प्रॉस्पेक्टस और सही आरक्षण रोस्टर जारी नहीं किया जाता, तब तक इंटरव्यू की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।

Share:

Comments

Leave a comment