जेएनयू में हॉस्टलों की गंभीर कमी के कारण नए छात्रों को मजबूरन मेस हॉल और किचन में रहना पड़ रहा है। द टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा 21 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक 'स्पॉट चेक' जांच से यह बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि छात्र बहुत तंग हॉल में रहने को मजबूर हैं, जहां चारपाईयां एक साथ सटी हुई हैं, रस्सियों पर कपड़े टंगे हैं और सामान रखने की जगह बहुत सीमित है। इन जगहों पर अलमारी और स्टडी टेबल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। नए छात्रों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सीधे इन अस्थायी डॉरमेट्री में भेज दिया जाता है। खबरों के मुताबिक, पक्का कमरा मिलने का इंतजार कुछ दिनों से लेकर पूरे सेमेस्टर तक हो सकता है। विश्वविद्यालय में कुल 18 हॉस्टलों और विवाहित छात्रों के लिए एक परिसर के बावजूद, प्रशासन साफ कहता है कि दाखिले से हॉस्टलों की गारंटी नहीं मिलती है और कमरे उपलब्धता के आधार पर ही दिए जाते हैं।
सरकारी नीति के अनुसार हॉस्टल प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर मिलते हैं, जिसमें एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए 22.5 प्रतिशत और शारीरिक रूप से विकलांग छात्रों के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण का नियम है।
जिन पात्र छात्रों के परिवारों की सालाना आय 75,000 रुपये से कम है और उन्हें फेलोशिप नहीं मिलती, वे हॉस्टल फीस से मुक्त हैं। साल 2026-27 के नए शैक्षणिक सत्र को लेकर उपजे तनाव के बीच 1 सितंबर 2026 को जोरदार प्रदर्शन हुए थे। जेएनयूएसयू के महासचिव सुनील यादव ने पहले बताया था कि प्रशासन ने यूजी और पीजी छात्रों की आवंटन सूची जारी करने और माही-मंडावी हॉस्टल में खराब पलंग और लॉकर जैसी बुनियादी समस्याओं को ठीक करने का वादा किया था। साथ ही, चंद्रभागा हॉस्टल में छात्राओं के लिए एक नया डॉरमेट्री खोलने की भी योजना है। इन सब कोशिशों के बावजूद,
10 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि नए छात्रों को सीनियरों के कमरे खाली करने का इंतजार करना पड़ रहा है इसलिए यह समस्या अभी भी बनी हुई है। विश्वविद्यालय उन पूर्णकालिक छात्रों को प्राथमिकता देता है जिन्होंने दिल्ली के बाहर से अपनी योग्यता परीक्षा पूरी की है।