JNU में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी, वेतन और लेबर लॉ पर टकराव
वेतन और लेबर लॉ के उल्लंघन को लेकर JNU के 500 से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी हड़ताल पर हैं। जानें क्या हैं उनकी मुख्य मांगें।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में वेतन और लेबर लॉ के उल्लंघन को लेकर शुरू हुई JNU contract workers strike अब तीसरे दिन में प्रवेश कर चुकी है। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU) के नेतृत्व में करीब 500 से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी काम बंद कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस हड़ताल में कैंपस के सफाई कर्मचारी, मेस अटेंडेंट, सुरक्षा गार्ड, बागवानी और रखरखाव कर्मचारी शामिल हैं, जिससे विश्वविद्यालय की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि उनके वेतन से अवैध कटौती की जा रही है और वैधानिक बोनस का भुगतान या तो नहीं किया गया है या अधूरा है। इसके अलावा, मैटरनिटी बेनिफिट्स, अर्नड लीव और कैजुअल लीव जैसे बुनियादी श्रम कानूनों का भी उल्लंघन किया जा रहा है। यूनियन की मुख्य मांगों में 'समान काम के लिए समान वेतन' और बिना किसी औपचारिक जांच के किए जा रहे मनमाने निलंबन और छंटनी को रोकना शामिल है। कर्मचारियों ने यह भी शिकायत की है कि उन्हें सैलरी स्लिप और पहचान पत्र नहीं दिए जा रहे हैं और कैंपस में कोई प्रभावी शिकायत निवारण समिति (Grievance Redressal Committee) नहीं है।
प्रशासन और कर्मचारियों के बीच गतिरोध
हड़ताल पर गए कर्मचारियों का दावा है कि सितंबर 2026 में असिस्टेंट लेबर कमिश्नर (ALC) ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मनमानी छंटनी रोकी जाए, सैलरी स्लिप दी जाएं और बोनस का ऑडिट किया जाए, लेकिन प्रशासन ने इन आदेशों को लागू नहीं किया।
इस विरोध का असर कैंपस में साफ दिख रहा है। सफाई कर्मचारियों के पूरी तरह काम बंद करने से स्वच्छता सेवाएं ठप हो गई हैं, वहीं मेस स्टाफ अपनी ड्यूटी तो कर रहे हैं, लेकिन विरोध जताने के लिए काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर, JNU प्रशासन ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की दूसरी अपील की है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि प्रशासनिक ब्लॉक के पास विरोध प्रदर्शन करने पर अदालती रोक है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि लेबर कमिश्नर के कार्यालय में सुलह की प्रक्रिया चल रही है और वे आपसी सहमति से विवाद सुलझाने के इच्छुक हैं।