JMI छात्र संघ चुनाव: 20 साल पुराना गतिरोध खत्म, यूनिवर्सिटी प्रशासन के फैसले का कर्मचारियों ने किया स्वागत
जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन ने 20 साल पुराने छात्र संघ चुनाव विवाद को सुलझा लिया है, जिसका कर्मचारियों ने स्वागत किया है।

जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी के लिए एक ऐतिहासिक पल आया है। करीब दो दशकों से चले आ रहे छात्र संघ चुनावों के विवाद को आखिरकार प्रशासन ने बातचीत के जरिए सुलझा लिया है। इस फैसले के बाद यूनिवर्सिटी के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ ने खुशी जाहिर करते हुए प्रशासन के प्रति अपना आभार जताया है।
अंसारी ऑडिटोरियम के लॉन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में 2,000 से अधिक कर्मचारी जुटे। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रशासन ने सूझबूझ और धैर्य का परिचय देते हुए इस 20 साल पुराने गतिरोध को खत्म किया है, वह काबिले तारीफ है। कर्मचारियों का मानना है कि यह फैसला न केवल छात्रों के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक प्रक्रिया और परीक्षाओं को भी बाधित होने से बचाएगा।
संवाद से निकला लोकतांत्रिक समाधान
यह समाधान रातों-रात नहीं आया, बल्कि इसके पीछे प्रशासन की कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास रहे हैं। बताया गया है कि प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ करीब आठ बार बैठकें कीं। बातचीत और विचार-विमर्श के इसी लोकतांत्रिक रास्ते ने आखिरकार एक सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला। कर्मचारियों ने इस बात की सराहना की कि पिछले कई प्रशासनों ने इस मुद्दे को या तो लटकाए रखा या अनसुलझा छोड़ दिया, लेकिन वर्तमान प्रशासन ने इसे हल करने की ईमानदारी दिखाई।
स्टाफ ने इस पूरी प्रक्रिया में भारत सरकार, विशेष रूप से शिक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए मार्गदर्शन और सहयोग के लिए भी धन्यवाद व्यक्त किया।
हालांकि, इस खुशी के बीच कर्मचारियों ने यूनिवर्सिटी परिसर में अनुशासन की कमी पर गहरी नाराजगी भी जताई। उन्होंने मांग की है कि यूनिवर्सिटी की दीवारों पर देशविरोधी नारे लिखने और गेट व अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा, कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले को 'जीत और हार' की लड़ाई के रूप में पेश करने वाले पोस्ट और रील्स की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के नैरेटिव यूनिवर्सिटी समुदाय को बांटने और ध्रुवीकृत करने की कोशिश हैं। उन्होंने प्रशासन, प्रोक्टोरियल टीम और हॉस्टल वार्डन को गलत तरीके से पेश करने वाले प्रयासों को भी गलत बताया।
कर्मचारियों ने जोर देकर कहा कि यह किसी एक पक्ष की जीत नहीं है, बल्कि यह जामिया की उन लोकतांत्रिक परंपराओं और मूल्यों की जीत है, जो संवाद, गरिमा और आपसी सम्मान पर आधारित हैं। यूनिवर्सिटी के 106वें स्थापना दिवस के मौके पर यह संदेश गया है कि शांति, अहिंसा और भाईचारा इस संस्थान की पहचान हैं।