जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की वापसी की तैयारी, संविधान ड्राफ्ट करने के लिए कमेटी गठित

दिल्ली की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी ने कैंपस में चल रहे छात्र विरोध को समाप्त करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) का संविधान तैयार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह फैसला कैंपस में छात्रों द्वारा की जा रही मांगों और उनके साथ हुए संवाद के बाद लिया गया है।
दरअसल, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 18 अक्टूबर को वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों की एक सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई थी, जिसका मकसद प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत करना और उनकी शिकायतों को सुनना था। इस समिति ने विरोध स्थल का दौरा किया और छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। हालांकि, चर्चा के बाद तैयार किए गए मिनट्स (कार्यवृत्त) पर हस्ताक्षर करने को लेकर छात्रों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन पाई थी, लेकिन यूनिवर्सिटी ने मामले को सुलझाने की कोशिशें जारी रखीं।
दो दशकों बाद लौटेगा छात्र संघ, इन बिंदुओं पर होगा विचार
कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ की अध्यक्षता और रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी की मौजूदगी में हुई एक अहम बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि चूंकि कैंपस में आखिरी बार छात्र संघ का गठन 2006 में हुआ था और उसके बाद इसे भंग कर दिया गया था, इसलिए पिछले दो दशकों में हुए कानूनी और संस्थागत बदलावों को देखते हुए एक नए संविधान की जरूरत है।
यह नई समिति निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करेगी:
- 2006 में JMISU के भंग होने के कारणों की समीक्षा।
- छात्र संघ चुनावों से संबंधित सक्षम न्यायालयों के विभिन्न आदेश और फैसले।
- देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र निकायों के लिए लागू 'लिंगदोह समिति' (2007) की सिफारिशें।
- जामिया मिलिया इस्लामिया के मौजूदा अध्यादेश और वैधानिक नियम।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि वह छात्रों के अधिकारों की रक्षा करने और कैंपस में शांति व सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन का लक्ष्य एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जो यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को बनाए रखते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा दे सके।