वेस्टवॉटर रियूज को बढ़ावा देगा भारत, JICA और CPHEEO ने शुरू किया खास प्रोजेक्ट

बढ़ते शहरीकरण और आबादी के दबाव के बीच पानी के संकट से निपटने के लिए भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) और केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण इंजीनियरिंग संगठन (CPHEEO) ने मिलकर 'ट्रीटेड वेस्टवॉटर रियूज प्रोजेक्ट' (treated wastewater reuse project) की शुरुआत की है। इस पहल का मकसद देश भर में उपचारित अपशिष्ट जल के सुरक्षित और टिकाऊ पुन: उपयोग को बढ़ावा देना है।
नई दिल्ली में 3 अक्टूबर, 2026 को दोनों संस्थाओं के बीच एक समझौते (Record of Discussions) पर हस्ताक्षर किए गए। यह तकनीकी सहयोग प्रोजेक्ट अगले तीन सालों तक चलेगा, जिसके तहत संस्थागत ढांचे को मजबूत किया जाएगा और तकनीकी क्षमताओं को विकसित किया जाएगा ताकि गंदे पानी को साफ कर उसे दोबारा इस्तेमाल करने की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके।
राष्ट्रीय जल लक्ष्यों को मिलेगी मजबूती
यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के उन बड़े लक्ष्यों के साथ मेल खाता है, जो अमृत (AMRUT) और अमृत 2.0 मिशन के जरिए तय किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि राज्यों में शहरी पानी की मांग का 20% और औद्योगिक पानी की मांग का 40% हिस्सा रिसाइकिल किए गए पानी से पूरा किया जाए।
इस महत्वपूर्ण समझौते पर CPHEEO के सलाहकार (प्रभारी) डॉ. वी.के. चौरसिया और JICA इंडिया ऑफिस के मुख्य प्रतिनिधि मिस्टर ताकेउची ताकुरो ने हस्ताक्षर किए। इस समारोह के दौरान वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। यह साझेदारी आर्थिक विकास और शहरी विस्तार के कारण पानी के संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मददगार साबित होगी।