पत्नी की बीमारी के कारण जवाद अहमद सिद्दीकी को मिली 7 दिन की पैरोल
मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी को पत्नी की बीमारी के चलते दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 दिनों की कस्टडी पैरोल दी है।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे अल-फलाह ट्रस्ट के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी पत्नी की गंभीर बीमारी को देखते हुए उन्हें सात दिनों की कस्टडी पैरोल देने का फैसला किया है। जस्टिस मिनी पुष्करणा ने शुक्रवार को यह आदेश जारी किया, जिससे सिद्दीकी अब अपनी पत्नी की देखभाल कर सकेंगे।
दरअसल, जवाद अहमद सिद्दीकी ने अपनी पत्नी की मेडिकल जरूरतों का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की थी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनकी पत्नी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही हैं और उन्हें 8 नवंबर को एक जरूरी मेडिकल टेस्ट कराना है, जबकि 10 नवंबर को उनका कीमोथेरेपी सेशन तय है। कोर्ट ने मेडिकल दस्तावेजों की गहन जांच करने के बाद उनकी स्थिति को गंभीर माना और मानवीय आधार पर पैरोल मंजूर की।
पुलिस सुरक्षा में रहेंगे आरोपी
हालांकि, यह राहत बिना किसी शर्त के नहीं मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस आवेदन का कड़ा विरोध किया था। ED का तर्क था कि आरोपी के बाहर जाने से उनके फरार होने का खतरा हो सकता है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एक बीच का रास्ता निकाला। कोर्ट ने आदेश दिया कि सिद्दीकी को कस्टडी पैरोल दी जाए, लेकिन पूरी अवधि के दौरान उनके घर पर पुलिस का पहरा रहेगा। पुलिस एस्कॉर्ट की तैनाती यह सुनिश्चित करेगी कि आरोपी नियमों का उल्लंघन न करें।
यह पहली बार नहीं है जब सिद्दीकी को उनकी पत्नी की बीमारी के कारण राहत मिली हो। इससे पहले जुलाई 2026 में भी जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने उन्हें अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए तीन दिनों की कस्टडी पैरोल दी थी, हालांकि उस समय उनकी अंतरिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी गई थी।