जंतर मंतर हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट पैनल ने शुरू किया ऑनलाइन पोर्टल, अब ऐसे दर्ज होगी शिकायत

जुलाई 2026 में जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा की जांच अब डिजिटल हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) ने इस मामले में शिकायतों और सबूतों को इकट्ठा करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल hpec.nic.in लॉन्च किया है। इस पोर्टल के जरिए पीड़ित लोग, गवाह और अन्य संबंधित पक्ष अपनी बात रख सकते हैं और जरूरी दस्तावेज जमा कर सकते हैं।
यह कदम उन लोगों के लिए बेहद अहम है जो उस हिंसा से प्रभावित हुए थे। कमेटी ने साफ किया है कि पोर्टल के अलावा लोग अपनी शिकायतें ईमेल ([email protected]) के जरिए भेज सकते हैं या फिर डाक द्वारा भेज सकते हैं। जो लोग व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहते हैं, वे कार्य दिवसों पर दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच शिक्षा सदन, 17, राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली स्थित HPEC कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
इन गंभीर आरोपों की होगी जांच
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय इस कमेटी में पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, पूर्व जज शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और रिटायर्ड डीजीपी डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं। कमेटी मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं की जांच कर रही है:
- पुलिस द्वारा पेलेट गन का इस्तेमाल और अत्यधिक बल प्रयोग।
- महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न।
- प्रदर्शन के दौरान हुई संपत्तियों की तोड़-फोड़।
- प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर किए गए हमले और हिंसा के आरोप।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया में संवेदनशील गवाहों की गोपनीयता बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में 'डी-नोटिफाई' करने को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान, बुरारी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड जाने का निर्देश दिया था, जिसे चुनौती दी गई है। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने हलफनामे में सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए इस फैसले का बचाव किया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट 46 संबंधित याचिकाओं की समीक्षा कर रहा है और सभी सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है।