जंतर मंतर अतिक्रमण मामला: दिल्ली पुलिस ने क्राइम ब्रांच को सौंपी जांच

दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो कार्यकर्ताओं, आशुतोष रंका और सौरव दास के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। यह कार्रवाई जंतर मंतर और कनॉट प्लेस में बिना अनुमति प्रवेश और विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में की गई है। सूत्रों के मुताबिक, 13 अक्टूबर को हुई इन घटनाओं के बाद दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिनमें से अब दोनों ही केस क्राइम ब्रांच के पास चले गए हैं।
हाई कोर्ट पहुंचा मामला, हिरासत पर उठाए सवाल
इस पूरे विवाद के बीच, सौरव दास और आशुतोष रंका ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत को बढ़ाया गया था। उनके कानूनी दल का तर्क है कि जमानत के लिए जरूरी मुचलके (sureties) पेश करने के बावजूद उन्हें हिरासत में रखना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
वकीलों के अनुसार, मजिस्ट्रेट ने 19 अक्टूबर को पेश किए गए नए मुचलकों को खारिज कर दिया और उनसे यह स्पष्ट करने को कहा कि शांति भंग होने की आशंका क्यों नहीं होनी चाहिए। यह मामला अब कोर्ट की सुनवाई के अधीन है।
बता दें कि इन दोनों कार्यकर्ताओं को सबसे पहले 10 अक्टूबर को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर हिरासत में लिया गया था। इसके बाद 11 अक्टूबर को उनके खिलाफ निवारक कार्रवाई (preventive proceedings) शुरू की गई और 50,000 रुपये के बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा किया गया। हालांकि, 13 अक्टूबर को जब वे राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर मंतर पहुंचे, तो उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया और 14 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने 19 अक्टूबर को यह दलील देते हुए उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग की थी कि इससे शांति भंग होने का खतरा है। अब कार्यकर्ता अनुच्छेद 21 के तहत अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मांग करते हुए कोर्ट से इस आदेश को रद्द करने की अपील कर रहे हैं।