जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शन की जगह नहीं, दिल्ली पुलिस ने 33 साल बाद बदला नियम

राजधानी दिल्ली के दिल में स्थित जंतर मंतर, जो पिछले तीन दशकों से आम जनता की आवाज और विरोध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा केंद्र रहा है, अब आधिकारिक तौर पर विरोध स्थल नहीं रहा। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने एक आदेश जारी कर जंतर मंतर को 'डेजिग्नेटेड प्रोटेस्ट साइट' की सूची से हटा दिया है। इस फैसले के साथ ही 33 साल पुराना वह दौर खत्म हो गया है जब लोग अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए इसी जगह पर जमा होते थे।
यह बदलाव केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद किया गया है। पुलिस कमिश्नर ने 11 अक्टूबर को इस आदेश पर हस्ताक्षर किए, जो अप्रैल 2022 में जारी पिछले स्टैंडिंग ऑर्डर में एक संशोधन है। मंत्रालय का उद्देश्य नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को सुरक्षित रखते हुए उनके लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करना था।
अब इन तीन मैदानों में होंगे प्रदर्शन
जंतर मंतर की जगह अब दिल्ली पुलिस ने तीन वैकल्पिक स्थानों को अधिकृत किया है। प्रदर्शनकारियों को अब शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाना होगा, जो मुख्य केंद्र से काफी दूर हैं:
- रामलीला मैदान: यह पुराने स्थल से लगभग 3 किमी दूर है और यहाँ 50,000 लोग जमा हो सकते हैं।
- सीबीडी ग्राउंड (शाहदरा): यह करीब 12 किमी दूर है और इसकी क्षमता 15,000 लोगों की है।
- बुरारी ग्राउंड: यह सबसे दूर यानी 21 किमी की दूरी पर है, लेकिन यहाँ 80,000 लोगों के बैठने की जगह है।
जहाँ जंतर मंतर पर एक समय में केवल 3,000 लोग ही समा पाते थे, वहीं नए मैदानों में क्षमता काफी ज्यादा है। हालांकि, संसद भवन के पास प्रदर्शन करने वाले लोगों के लिए अब लॉजिस्टिक्स और आने-जाने की बड़ी चुनौती होगी। वहीं, लुटियंस जोन में ट्रैफिक मैनेजमेंट अब पुलिस के लिए आसान हो जाएगा, लेकिन नए मैदानों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना एक बड़ी चुनौती होगी।
जंतर मंतर का इतिहास बेहद प्रभावशाली रहा है। 1993 के आसपास यह विरोध का मुख्य केंद्र बना। 2011 में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हो, 2012 का निर्भया विरोध प्रदर्शन, या 2023 में पहलवानों का प्रदर्शन—इस जगह ने देश की कई बड़ी राजनीतिक हलचलों को देखा है। हालांकि, शोर और गंदगी को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यहाँ प्रतिबंध लगाने की बात कही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि विरोध के अधिकार पर कोई भी रोक उचित और संतुलित होनी चाहिए।
इस फैसले का असर उन छोटे दुकानदारों पर भी पड़ेगा जो प्रदर्शनकारियों की भीड़ की वजह से अपनी रोजी-रोटी चलाते थे। अब दिल्ली पुलिस जल्द ही इन नए स्थलों के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करेगी, ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाया जा सके।