जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शन के लिए बंद, नए मैदानों की बुकिंग फीस ने बढ़ाई टेंशन

दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वालों के लिए एक बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर 2026 के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल (डी-नोटिफाई) से हटा दिया है। अब प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर के बजाय तीन नए स्थानों—रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और शाहदरा के सीबीडी ग्राउंड का रुख करना होगा। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
लेकिन असली मुसीबत इन नए मैदानों की भारी-भरकम कीमत है। अगर कोई संगठन रामलीला मैदान के मुख्य 12 एकड़ वाले हिस्से में प्रदर्शन करना चाहता है, तो उसे प्रतिदिन 50,000 रुपये की फीस और 55,000 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी जमा करनी होगी। टैक्स मिलाकर एक दिन के प्रदर्शन का खर्च करीब 1,21,080 रुपये तक जा रहा है। इसके अलावा, एमसीडी से बुकिंग के लिए दिल्ली पुलिस से एनओसी (NOC) लेना अनिवार्य है। वहीं, सीबीडी ग्राउंड में 3,000 वर्ग मीटर के प्लॉट की कीमत टैक्स और सिक्योरिटी मिलाकर करीब 1,87,000 रुपये प्रतिदिन है।
विरोध प्रदर्शनों पर लगाम या लोकतंत्र पर प्रहार?
इस फैसले के बाद माहौल गरमा गया है। 13 अक्टूबर को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के कार्यकर्ताओं ने इस पाबंदी को चुनौती दी, जिसके बाद कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया। पार्टी के दो नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका को बैरिकेड्स तोड़ने के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने इसे असहमति को दबाने की 'कायरतापूर्ण' कोशिश बताया है।
इस मामले में विपक्षी नेता राहुल गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं को जेल भेजने की निंदा की और जंतर मंतर जैसे प्रतीकात्मक स्थल को वापस पाने की बात कही है।
प्रदर्शनकारियों के लिए एक और बड़ी चुनौती यह है कि रामलीला मैदान 2026 के अंत तक लगभग पूरी तरह बुक हो चुका है। साल के आखिरी तीन दिन (29, 30 और 31 दिसंबर) ही खाली बचे हैं। जबकि बुराड़ी और सीबीडी ग्राउंड का प्रबंधन दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) कर रहा है, जिनके लिए विस्तृत एसओपी (SOP) जल्द जारी किए जाएंगे।