जंतर मंतर प्रदर्शन में भारी बवाल: 15 पुलिसकर्मी घायल, 110 लोग हिरासत में

Kittu Kumari4 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जंतर मंतर प्रदर्शन में भारी बवाल: 15 पुलिसकर्मी घायल, 110 लोग हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब जंतर मंतर की ओर जा रहे एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। इस हिंसक टकराव में दिल्ली पुलिस के लगभग 15 जवान घायल हो गए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, झड़प इतनी उग्र थी कि कुछ महिला पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों ने काट लिया, जिससे उन्हें चोटें आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए करीब 110 लोगों को हिरासत में ले लिया है।

यह पूरा मामला इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) द्वारा निकाले गए एक विरोध मार्च से जुड़ा है। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता रायसीना रोड से जंतर मंतर की ओर मार्च कर रहे थे। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज उठाना और उनके इस्तीफे की मांग करना था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश कर रही है। भारी पुलिस बल की तैनाती और बैरिकेडिंग के बावजूद, सैकड़ों युवा कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लिए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

पुलिस की कार्रवाई पर यूथ कांग्रेस ने उठाए सवाल

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इस घटना के बाद यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जंतर मंतर जाने से उन्हें रोका गया। चिब ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाना चाहती है, इसलिए प्रदर्शनकारियों को रोका जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उन्हें जंतर मंतर नहीं जाने दिया जाएगा, वे वहीं धरने पर बैठ जाएंगे।

वहीं, यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव रोशनी जैसवाल और लीगल टीम की नेशनल कोऑर्डिनेटर चितवन गोदारा ने भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही से बच रही है और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे न्याय मिलने तक अपना विरोध जारी रखेंगे।

गौरतलब है कि यह विवाद एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें चुनाव आयोग के कुछ अधिकारियों द्वारा चुनावी रोल और टेक्नोलॉजी सिस्टम जैसे मुद्दों पर आपत्तियां जताने की बात कही गई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

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