जंतर मंतर पर प्रदर्शनों से दिल्ली मेट्रो बेपटरी, अब पुलिस ने छीना विरोध का हक

राजधानी के दिल में स्थित जंतर मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने इस साल आम जनता और दिल्ली मेट्रो की रफ्तार पर गहरा असर डाला है। जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को नौ अलग-अलग मौकों पर अपनी सेवाओं में बाधाओं का सामना करना पड़ा। इन प्रदर्शनों की वजह से यात्रियों की संख्या में 6% से लेकर 39% तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हो गया कि विरोध की आग में आम सफर भी झुलस रहा था।
सबसे बुरा हाल 10 अक्टूबर को देखा गया, जब हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि 45 मेट्रो स्टेशनों के दरवाजे बंद करने पड़े। हालांकि, DMRC ने मुश्किलों के बावजूद अपनी सेवाएं जारी रखीं और पूरे दिन 272 ट्रेनों का संचालन किया। इसी दिन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के एक बड़े प्रदर्शन ने शहर की रफ्तार रोक दी थी। सुरक्षा कारणों से दिल्ली पुलिस ने 30 जगहों पर ट्रैफिक पाबंदियां लगाईं और मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट तक बंद कर दिया गया था।
अब रामलीला मैदान और बुरारी ग्राउंड होंगे विरोध के केंद्र
इन तमाम हंगामों और अव्यवस्था के बाद दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। 12 अक्टूबर को जंतर मंतर को आधिकारिक तौर पर विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में 'डी-नोटिफाई' कर दिया गया। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का हवाला दिया जिसमें वैकल्पिक स्थानों की पहचान करने को कहा गया था। अब प्रदर्शनकारियों को शहर के केंद्र से दूर रामलीला मैदान, शाहदरा के सीबीडी ग्राउंड और बुरारी ग्राउंड का रुख करना होगा, जो मुख्य शहर से करीब 14 से 23 किलोमीटर दूर हैं।
इस फैसले ने एक नया कानूनी विवाद भी खड़ा कर दिया है। इंडियन यूथ कांग्रेस ने जंतर मंतर को डी-नोटिफाई करने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस काफी सख्त है। 14 अक्टूबर को CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को शांति भंग करने और अतिक्रमण के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वर्तमान में, राजधानी में शांति बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो।