जंतर मंतर पर प्रदर्शनों से मेट्रो सेवा ठप, अब विरोध स्थल के रूप में डी-नोटिफाई हुआ यह इलाका

राजधानी दिल्ली के दिल में स्थित जंतर मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने शहर की रफ्तार पर गहरा असर डाला है। साल 2026 में अब तक नौ बार यहां हुए आंदोलनों की वजह से दिल्ली मेट्रो की सेवाओं में भारी व्यवधान देखा गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सुरक्षा कारणों से कई बार मेट्रो सेवाएं पूरी तरह निलंबित करनी पड़ीं, जिससे यात्रियों की संख्या में 6% से लेकर 39% तक की गिरावट दर्ज की गई।
सबसे बुरा हाल 10 अक्टूबर को तब हुआ जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की एक रैली के कारण दिल्ली के 45 मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े। उस दिन 200 से अधिक ट्रेनों को रद्द या रीशेड्यूल किया गया और सेंट्रल दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट तक बंद कर दिया गया। हालांकि, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने यात्रियों की भीड़ संभालने के लिए 272 ट्रेन ट्रिप चालू रखे थे, लेकिन शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी।
अब रामलीला मैदान और अन्य ग्राउंड्स पर होंगे प्रदर्शन
इन तमाम हंगामों और सुरक्षा चुनौतियों के बाद, दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर मंतर को आधिकारिक तौर पर विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में 'डी-नोटिफाई' कर दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद उठाया गया है जिसमें विरोध प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक स्थानों की पहचान करने को कहा गया था। अब प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान, शाहदरा के सीबीडी ग्राउंड (सेंट्रल ऑफिस से 14 किमी दूर) और बुराड़ी ग्राउंड (23 किमी दूर) जैसे स्थानों पर जाना होगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक तनाव भी बढ़ा है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका को शांति भंग करने और अनधिकृत प्रवेश के आरोप में 14 अक्टूबर को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं, इंडियन यूथ कांग्रेस ने जंतर मंतर को डी-नोटिफाई करने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
भले ही CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके इसे 'प्रतिरोध की भावना' का प्रतीक मान रहे हों, लेकिन दिल्ली पुलिस अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर रही है ताकि राजधानी में किसी भी अनधिकृत भीड़ या जमावड़े को रोका जा सके।