जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन मामला: अब क्राइम ब्रांच करेगी जांच, पुलिस ने ट्रांसफर की फाइल

दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में एक बड़ा कदम उठाया है। इस केस की पूरी जांच अब क्राइम ब्रांच के इंटर-स्टेट सेल को सौंप दी गई है। इस पूरे विवाद में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो प्रमुख नेता, सौरव दास और आशुतोष रंका पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस अब इस मामले की गहराई से पड़ताल करना चाहती है।
इस घटना को लेकर दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पुलिस स्टेशनों में दो अलग-अलग FIR दर्ज कराई थीं। इन मामलों में कुल आठ कानूनी धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें सरकारी काम में बाधा डालना, निजी संपत्ति में बिना अनुमति घुसना और पुलिस कर्मियों को अपनी ड्यूटी करने से रोकने के लिए बल प्रयोग करना जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सौरव दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे और CJP के 11 अन्य सदस्यों ने एक निजी परिसर के जरिए जंतर मंतर में अनाधिकृत प्रवेश किया, जबकि अब यह जगह विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल नहीं है।
कोर्ट ने जमानत याचिका ठुकराई, हिरासत बढ़ाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने 19 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपियों ने कानून का सम्मान नहीं किया और 11 अक्टूबर को जमा किए गए बॉन्ड का उल्लंघन किया, जिससे शांति भंग हुई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में यह भी जिक्र था कि CJP सदस्यों ने पाबंदियों के बावजूद आम जनता को वहां विरोध प्रदर्शन के लिए उकसाया था। हालांकि अजिंक्य शिंदे को निजी बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया, लेकिन दास और रंका की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि वे दोबारा ऐसी भीड़ इकट्ठा कर सकते हैं।
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत डिपके ने इन गिरफ्तारियों पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार युवा प्रदर्शनकारियों को डराने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने दावा किया कि दोनों नेता अपनी हिरासत के दौरान भी अपने स्टैंड पर अडिग रहे हैं।