जंतर मंतर अब नहीं रहेगा विरोध का केंद्र, दिल्ली पुलिस ने बदला नियम

Kittu Kumari14 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जंतर मंतर अब नहीं रहेगा विरोध का केंद्र, दिल्ली पुलिस ने बदला नियम

राजधानी दिल्ली के दिल में स्थित जंतर मंतर, जो दशकों से आम जनता की आवाज और विरोध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा केंद्र रहा है, अब आधिकारिक तौर पर इस सूची से बाहर हो गया है। दिल्ली पुलिस ने इसे आधिकारिक विरोध स्थल (Protest Venue) के रूप में 'डी-नोटिफाई' कर दिया है। यह फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए बड़े जनाक्रोश और प्रदर्शनों के बाद लिया गया है।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया, जिससे 28 अप्रैल 2022 को लागू किए गए स्टैंडिंग ऑर्डर में बदलाव किया गया है। यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद उठाया गया है। दिल्ली पुलिस ने 14 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट में स्पष्ट किया कि यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के उस आदेश के बाद किया गया है, जिसमें बेहतर सुविधाओं वाले विरोध स्थलों की पहचान करने की बात कही गई थी।

प्रदर्शन के लिए अब मिलेंगे ये तीन विकल्प

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

जंतर मंतर की जगह अब प्रदर्शनकारियों के लिए तीन वैकल्पिक स्थलों का चयन किया गया है। अब लोग इन जगहों पर अपनी बात रख सकेंगे:

  • रामलीला मैदान: मध्य दिल्ली के लिए।
  • बुरारी ग्राउंड: उत्तरी दिल्ली के लिए।
  • सीबीडी ग्राउंड: शाहदरा इलाके के लिए।

इस फैसले पर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे सरकार की "अत्यधिक घबराहट" का संकेत बताया है और आरोप लगाया है कि प्रशासन के लिए लोकतंत्र अब गौण हो गया है। दूसरी ओर, पूर्व दिल्ली पुलिस कमिश्नर किरण बेदी ने इस फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि जंतर मंतर का इलाका संकरा है और संवेदनशील जगहों के करीब होने के कारण वहां भीड़ संभालना मुश्किल होता है। पूर्व सीआरपीएफ आईजी आर.के. यादव ने भी माना कि इससे मध्य दिल्ली में ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन में सुधार होगा।

इस नए नियम के लागू होते ही विवाद भी शुरू हो गया है। 13 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रंका ने जंतर मंतर पर विरोध करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और उन पर अतिक्रमण की FIR दर्ज की गई। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि "प्रतिरोध को डी-नोटिफाई नहीं किया जा सकता।" वहीं, पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया है कि शहर से दूर बनाए गए वैकल्पिक मैदान आम जनता के लिए कितने सुलभ होंगे। फिलहाल, इस डी-नोटिफिकेशन और पुलिस की पाबंदियों के खिलाफ कई याचिकाएं दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित हैं।

Share:

Comments

Leave a comment