दिल्ली के प्रोफेसर जोगिंदर सिंह मार्ग पर बैंक कर्मी कमल ध्यानी की मौत के सात महीने बाद भी सड़क की हालत में सुधार नहीं हुआ है। फरवरी में 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरने से कमल की मौत हो गई थी, जिसके बाद से यह इलाका लगातार अधूरी मरम्मत और लापरवाही का शिकार बना हुआ है। दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवर लाइन के लिए खोदी गई जगह को भले ही भर दिया गया है, लेकिन आसपास की सड़क अभी भी उबड़-काबड़ और संकीर्ण है। बैरिकेड्स के पीछे टूटे हुए टॉयलेट सीट और लकड़ी के तख्ते जैसे कचरे के साथ उखड़े हुए पेड़ पड़े हुए हैं।
सड़क का एक हिस्सा बंद रहने के कारण दोनों तरफ का ट्रैफिक एक ही लेन से गुजरने को मजबूर है। इस वजह से इलाके में लगातार जाम और धूल की समस्या बनी रहती है, जिससे वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल यात्रियों के लिए चलने की कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। दिल्ली जल बोर्ड और लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क की मरम्मत को लेकर कोई जवाब नहीं दिया है। दुर्घटना के तुरंत बाद लापरवाही के आरोप में जल बोर्ड के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था।
फरवरी की इस घटना के बाद अप्रैल 2026 तक दिल्ली पुलिस ने ठेकेदार कंपनी के निदेशक, सब-कंट्रैक्टर और एक मजदूर के खिलाफ 877 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या, सबूत मिटाने, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप दर्ज किए गए हैं। घटना के समय सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे और कोई चेतावनी संकेत या रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए थे। हालांकि सरकार ने सुरक्षा ऑडिट की घोषणा की थी और मंत्री आशीष सूद ने क्षेत्र में विकास कार्यों की शुरुआत की थी, लेकिन
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति अभी तक सामान्य नहीं हो पाई है।