जामिया यूनिवर्सिटी: प्रशासन का नोटिस खारिज, छात्र बोले- जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, जारी रहेगा प्रदर्शन
जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के नोटिस को खारिज करते हुए अपनी मांगों पर अड़े रहने और भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पिछले 14 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जारी किए गए एक नोटिस के बावजूद, प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। छात्रों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। इस बीच, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने भी स्पष्ट किया है कि वे अपनी हड़ताल खत्म नहीं करेंगे।
दरअसल, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सोमवार को एक आदेश जारी कर करीब दो दशक बाद छात्र संघ चुनाव कराने की बात कही थी। प्रशासन का दावा था कि छात्र संघ के संविधान की मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। लेकिन छात्रों ने इस कदम को केवल एक 'अस्पष्ट आश्वासन' करार दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने चुनाव के लिए कोई निश्चित समयसीमा (टाइमलाइन) तय नहीं की है और न ही संविधान की मंजूरी की कोई तारीख बताई है।
छात्रों की मुख्य मांगें और प्रशासन पर नाराजगी
छात्रों ने मीडिया में आ रही उन खबरों का भी खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि उन्होंने प्रशासन के आश्वासनों को स्वीकार कर लिया है और विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया है। छात्रों के अनुसार, ये खबरें प्रशासन के नजरिए से पेश की गई हैं, जबकि हकीकत इससे अलग है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी नाराजगी जताते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया है:
- छात्र संघ की बहाली के लिए एक स्पष्ट और लिखित प्रतिबद्धता दी जाए।
- चुनाव प्रक्रिया के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की जाए।
- यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार (Security Adviser) के इस्तीफे की मांग पूरी हो।
छात्रों का कहना है कि 2006 में छात्र संघ को भंग कर दिया गया था और तब से वे इसकी बहाली की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि केवल एक नोटिस जारी कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "हम अस्पष्ट बयानों को अपनी मांगों की पूर्ति नहीं मान सकते। प्रशासन को ठोस और समयबद्ध निर्णय लेने होंगे।"
कुल मिलाकर, जामिया कैंपस में तनाव बरकरार है और छात्र तब तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं जब तक उन्हें उनकी मांगों पर लिखित और स्पष्ट आश्वासन नहीं मिल जाता।