जामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ बहाली के लिए 17वें दिन भी भूख हड़ताल, कैंपस में तनाव
जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। कैंपस में तनाव और भारी सुरक्षा बल तैनात।

नई दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी में माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर यूनिवर्सिटी के छात्र पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। यह विरोध प्रदर्शन 28 अक्टूबर 2026 को अपने 17वें दिन में प्रवेश कर गया। छात्रों की मुख्य मांग है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्र संघ को दोबारा बहाल करे, जिस पर 31 मार्च 2006 से प्रतिबंध लगा हुआ है। प्रशासन ने उस समय हिंसा और शैक्षणिक कार्यों में बाधा का हवाला देते हुए इस पर रोक लगाई थी।
प्रदर्शनकारी छात्रों, जिनमें रेहान खान शामिल हैं, की मांग है कि नए छात्र संघ के संविधान की मंजूरी और चुनाव प्रक्रिया के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाए। इसके अलावा, छात्र चीफ प्रॉक्टर को हटाने, लाइब्रेरी और कैंटीन को दोबारा खोलने और ऑनलाइन कक्षाओं को बंद करने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन और छात्रों के बीच गतिरोध बरकरार
विवाद को सुलझाने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 26 अक्टूबर को एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें कहा गया कि नए संविधान की मंजूरी के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही, निलंबन नोटिस वापस लेने और सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच का वादा भी किया गया। हालांकि, प्रशासन ने इस शर्त को रखा कि छात्र सोशल मीडिया पर किए गए अपमानजनक पोस्ट को हटाएं और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। छात्रों ने इस प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया कि इसमें कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी गई है।
इस गतिरोध के बीच यूनिवर्सिटी ने अब 24 नवंबर 2026 तक ऑनलाइन कक्षाओं को बढ़ा दिया है और विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं भी ऑनलाइन होंगी। फिजिकल क्लास अब जनवरी 2027 के बाद ही शुरू होने की संभावना है।
दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार महताब आलम रिज़वी ने आरोप लगाया है कि 27 अक्टूबर की रात को कैंपस में तोड़फोड़ की गई, जिसमें गेट, बाउंड्री वॉल और सीसीटीवी कंट्रोल रूम को नुकसान पहुँचाया गया। प्रशासन अब हॉस्टलों को बंद करने पर विचार कर रहा है, क्योंकि उनका दावा है कि तोड़फोड़ में शामिल 80 प्रतिशत लोग हॉस्टल निवासी हैं। साथ ही, महिला फैकल्टी और वार्डन ने महिला प्रदर्शनकारियों से धमकी मिलने की बात कही है।
सुरक्षा के मद्देनजर कैंपस के चारों ओर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। 27 अक्टूबर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी आवाजाही रोक दी है, गेट वेल्ड कर दिए हैं और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं में बाधा डाली जा रही है।
इस आंदोलन को NSUI, SFI, AISA और जम्मू-कश्मीर छात्र संघ जैसे कई संगठनों का समर्थन मिल रहा है। जहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शांति की अपील की है, वहीं कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने छात्रों के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर की है।