जामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव को लेकर बवाल, कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी, पुलिस बल तैनात और कक्षाएं ऑनलाइन हुईं।

देश की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी इन दिनों भारी तनाव के बीच है। छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब 16वें दिन भी जारी है। कैंपस के अंदर और बाहर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है।
यह पूरा विवाद 12 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ था। छात्रों की मुख्य मांगें छात्र संघ चुनावों को फिर से शुरू करना, प्रदर्शनकारियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेना और चीफ प्रॉक्टर व सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे को लेकर हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन छात्र इनसे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
प्रशासन की शर्तों और छात्रों की जिद के बीच फंसा मामला
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने 26 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर छात्रों की तीन प्रमुख मांगों को मानने की बात कही। प्रशासन ने कहा है कि छात्र संघ के संविधान को औपचारिक मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे, विरोध के दौरान दिए गए सस्पेंशन और नोटिस वापस लिए जाएंगे और सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी।
हालांकि, छात्रों का तर्क है कि जब तक संविधान की मंजूरी की कोई तय तारीख नहीं आती और मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति नहीं होती, तब तक चुनाव की समयसीमा केवल कागजी है। वहीं, प्रशासन ने एक कड़ी शर्त रखी है कि प्रदर्शनकारी छात्रों को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक माफी मांगनी होगी और यूनिवर्सिटी नेतृत्व के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिखे गए अपमानजनक पोस्ट हटाने होंगे।
तनाव इतना बढ़ गया कि 26 अक्टूबर को पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने यूनिवर्सिटी के गेट बंद कर दिए, जिसके बाद कुछ छात्र दीवारों फांदकर अंदर घुसे। इस झड़प के दौरान पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में भी लिया। छात्रों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उनकी बिजली और पानी की सप्लाई काट दी है। इस पूरी उथल-पुथल के बीच यूनिवर्सिटी ने 24 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 तक सभी कक्षाओं को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट कर दिया है।
बता दें कि साल 2005 के बाद से जामिया में छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। हालांकि 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि चुनावों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, फिर भी करीब दो दशकों से कैंपस में कोई निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि नहीं है। इस बीच, भूख हड़ताल पर बैठे चार छात्रों में से दो ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी है, जबकि रेहान खान और एबिन बेसिल अभी भी अनशन पर हैं। डेमोक्रेटिक टीचर्स इनिशिएटिव (DTI) ने भी छात्रों पर की गई कार्रवाई की निंदा करते हुए यूनियन की बहाली की मांग की है।