जामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ संविधान बहाल, केसी वेणुगोपाल बोले- युवाओं की आवाज दबाने वालों को मिला सबक

जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन ने छात्र संघ संविधान बहाल करने का फैसला किया है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है।

Kittu Kumari29 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ संविधान बहाल, केसी वेणुगोपाल बोले- युवाओं की आवाज दबाने वालों को मिला सबक

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए एक बड़ी जीत सामने आई है। लंबे संघर्ष और 18 दिनों तक चले भूख हड़ताल के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन आखिरकार झुक गया है और छात्र संघ के संविधान को बहाल करने पर सहमति जता दी है। इस फैसले के बाद कैंपस में खुशी का माहौल है और राजनीतिक गलियारों में भी इस पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस जीत का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जामिया के छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि छात्र शक्ति के आगे किसी को भी झुकना पड़ता है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि भाजपा नियंत्रित प्रशासन ने छात्रों को बदनाम करने और उन्हें आपस में बांटने की हर संभव कोशिश की, लेकिन छात्रों के अहिंसक संघर्ष ने अंततः जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि यह उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश करते हैं।

चुनाव की तारीख और प्रशासन का फैसला

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यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, छात्र संघ संविधान की मंजूरी और उसे लागू करने की समय सीमा 15 मई, 2027 तय की गई है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। यानी लगभग 16 जुलाई 2027 के बाद छह हफ्ते के अंदर चुनाव की प्रक्रिया पूरी होगी। ये चुनाव लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और दिशा-निर्देशों के आधार पर आयोजित किए जाएंगे।

छात्रों के लिए एक और बड़ी राहत की बात यह है कि प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन के दौरान जारी किए गए सभी कारण बताओ नोटिस, अनुशासनात्मक कार्रवाइयों, रस्टिकेशन (निष्कासन), निलंबन और कैंपस बैन के आदेशों को वापस ले लिया है। रजिस्ट्रार प्रोफेसर महताब आलम रिज़वी द्वारा जारी यह आदेश छात्रों द्वारा दिए गए अनुरोध पत्र पर विचार करने के बाद आया है।

केसी वेणुगोपाल ने अपने बयान में उन NSUI नेताओं का भी जिक्र किया जिन्हें इस मांग के लिए विरोध प्रदर्शन करते समय तिहाड़ जेल भेजना पड़ा था। उन्होंने छात्रों के धैर्य और उनके अहिंसक तरीके की सराहना करते हुए उन्हें सलाम किया है।

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