जामिया यूनिवर्सिटी में 16वें दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी, छात्रों ने चुनाव प्रस्ताव को ठुकराया
जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने प्रशासन के चुनाव प्रस्ताव को ठुकराया। भूख हड़ताल और भारी सुरक्षा के बीच कैंपस में तनाव बरकरार।

देश की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी में छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को इस विरोध प्रदर्शन को 16वां दिन हो गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामला सुलझाने के लिए चुनाव कराने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन छात्रों ने इसे अधूरा बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। कैंपस में तनाव इस कदर है कि मुख्य गेटों को लोहे की चादरों से सील कर दिया गया है और भारी सुरक्षा बल तैनात है।
छात्रों की मुख्य मांग यूनिवर्सिटी प्रशासन से एक लिखित प्रतिबद्धता हासिल करना है। उनका कहना है कि प्रशासन ने यह तो कह दिया कि संविधान की मंजूरी के 15 दिनों के भीतर चुनाव होंगे, लेकिन संविधान को मंजूरी देने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। प्रदर्शनकारी छात्र 20 दिसंबर 2026 तक संविधान की मंजूरी की समयसीमा पर अड़े हुए हैं। इसके अलावा, वे चीफ प्रॉक्टर और सिक्योरिटी एडवाइजर के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
भूख हड़ताल और प्रशासन की सख्ती
इस आंदोलन में रेहान खान, एबिन बेसिल, रितिक, अल्ताफ और अबुजर जैसे छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रशासन ने रेहान खान को विरोध स्थल खाली करने का निर्देश दिया है और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा है कि बातचीत जारी है और सभी पक्षों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साल 2006 के बाद से यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं और कुलपति इस स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
कैंपस के भीतर की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। यूनिवर्सिटी ने 8 नवंबर तक ऑनलाइन क्लासेस जारी रखने का फैसला किया है और मिड-टर्म परीक्षाएं भी ऑनलाइन ही होंगी। दिवाली से पहले फिजिकल क्लासेस शुरू नहीं होंगी। लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं फिलहाल बंद हैं और कैंपस के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है।
SFI, NSUI और AISA जैसे छात्र संगठनों का आरोप है कि कैंपस के अंदर बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली और पानी काट दिए गए हैं। उनका यह भी दावा है कि सुरक्षा गार्ड छात्रों को पुलिस के हवाले कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व प्रोफेसर गोपीनाथ रविंद्रन और सैयदा हमीद जैसी हस्तियों ने गहरी चिंता जताई है, खासकर छात्रों के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर।