जामिया यूनिवर्सिटी में छात्रों की भूख हड़ताल: प्रशासन ने बनाया 7 सदस्यीय पैनल

देश की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर छिड़ा आंदोलन अब दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर गया है। छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और कैंपस में बढ़ते तनाव को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आखिरकार कदम उठाया है। रविवार रात को प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय सात सदस्यीय समिति (पैनल) गठित करने का ऐलान किया है, ताकि प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत शुरू की जा सके और उनकी मांगों का समाधान निकाला जा सके।
यह फैसला कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी समेत वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद लिया गया है। गौरतलब है कि यह भूख हड़ताल 12 अक्टूबर 2026 से जारी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का लक्ष्य इस पैनल के जरिए छात्रों की शिकायतों की जांच करना और कैंपस में दोबारा सामान्य माहौल बहाल करना है।
छात्रों पर कार्रवाई और कैंपस में तनाव
आंदोलन के दौरान कैंपस का माहौल तब और बिगड़ गया जब यूनिवर्सिटी ने कुछ छात्रों पर सख्त disciplinary action लिया। 16 अक्टूबर को एलएलबी छात्र एबिन बेसिल को एक साल के लिए रस्टिकेट कर दिया गया, जबकि पीजी छात्र जासिम खान और एमए सोशल वर्क के छात्र रिहान हैदर को एक साल के लिए कैंपस बैन लगाकर सस्पेंड कर दिया गया। प्रशासन का आरोप है कि इन छात्रों ने अनधिकृत धरना दिया, स्टाफ के काम में बाधा डाली और सीसीटीवी कैमरों की फिटिंग में खलल डाला।
दूसरी ओर, एनएसयूआई (NSUI) और आइसा (AISA) जैसे छात्र संगठनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि 17 अक्टूबर को करीब 100 सुरक्षा गार्डों ने छात्रों के साथ बदसलूकी की और उन्हें जबरन विरोध स्थल से हटाया। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने बल प्रयोग की बात से इनकार किया है और कहा है कि छात्रों को सिर्फ निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाने के लिए कहा गया था। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने डॉ. जाकिर हुसैन लाइब्रेरी और ओल्ड लाइब्रेरी को भी बंद कर दिया है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों, जिनमें हिंदी पीएचडी स्कॉलर सौरभ त्रिपाठी शामिल हैं, की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को तुरंत बहाल किया जाए।
- छात्रों के खिलाफ की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए।
- चीफ प्रॉक्टर का इस्तीफा हो।
इस मामले में अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और जॉन ब्रिट्टास ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से अपील की है कि वे इस विवाद को जल्द सुलझाएं और छात्र संघ की बहाली पर विचार करें। बता दें कि साल 2006 के बाद से जामिया में छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं, जिसे प्रशासन पुरानी हिंसा और शैक्षणिक व्यवधान का कारण बताता है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि वे सिद्धांत रूप में यूनियन के खिलाफ नहीं हैं, बस एक औपचारिक ज्ञापन (memorandum) की आवश्यकता है।