जामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन का सख्त रुख, प्रदर्शनकारी छात्रों को दिया आखिरी नोटिस

जामिया मिलिया इस्लामिया ने प्रदर्शनकारी छात्रों को परिसर खाली करने का अंतिम नोटिस दिया है। जानें क्यों छिड़ा है यह विवाद और क्या है प्रशासन का रुख।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन का सख्त रुख, प्रदर्शनकारी छात्रों को दिया आखिरी नोटिस

दिल्ली की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी में पिछले कई दिनों से जारी तनाव अब और गहरा गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन पर कब्जा जमाए बैठे प्रदर्शनकारी छात्रों को एक अंतिम कानूनी नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि छात्रों ने तुरंत परिसर खाली नहीं किया, तो उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चीफ प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा जारी इस नोटिस में कहा गया है कि जिस जगह पर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, वह अनधिकृत है और इसकी वजह से पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स विभाग की पढ़ाई-लिखाई में भारी बाधा आ रही है। बता दें कि यह पूरा विवाद 12 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ था, जब छात्रों ने पिछले दो दशकों से निलंबित छात्र संघ चुनावों को दोबारा शुरू करने की मांग उठाई थी।

चुनाव का वादा और छात्रों की शर्तें

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मामले को सुलझाने के लिए यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिज़वी और कुलपति मज़हर आसिफ ने आश्वासन दिया था कि छात्र संघ के नए संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। प्रशासन ने छात्रों के प्रति नरम रुख दिखाते हुए पुराने सभी सस्पेंशन ऑर्डर और शो-कॉज नोटिस वापस ले लिए हैं। साथ ही, सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए एक कमेटी बनाने का वादा भी किया है। छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं और ऑनलाइन क्लास को 8 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है।

हालांकि, AISA, NSUI और फ्रेटरनिटी मूवमेंट जैसे संगठनों के समर्थन वाले छात्र प्रशासन की इन शर्तों से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि संविधान की मंजूरी के लिए 20 दिसंबर 2026 की डेडलाइन तय की जाए। साथ ही, वे चीफ प्रॉक्टर और चीफ सिक्योरिटी एडवाइजर के इस्तीफे और सभी कानूनी धमकियों को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि कैंपस में बिजली, पानी और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाएं बाधित की गई हैं।

तनाव तब और बढ़ गया जब 26 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने दीवार फांदकर कैंपस में घुसने की कोशिश कर रहे करीब 20 छात्रों को हिरासत में लिया। दक्षिण-पूर्व जिले के डीसीपी विनीत कुमार ने इन गिरफ्तारियों की पुष्टि की है। इस बीच, यूनिवर्सिटी ने कांग्रेस सांसदों इमरान प्रतापगर्जी, इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल नदवी के खिलाफ अनधिकृत प्रवेश के लिए एफआईआर दर्ज कराई है, जिसकी कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कड़ी आलोचना की है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के लिए केवल गेट नंबर 18 निर्धारित है और वर्तमान कब्जे के पीछे कुछ निजी हित जुड़े हुए हैं।

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