जामिया यूनिवर्सिटी में भारी तनाव: पुलिस घेराबंदी के बीच छात्रों ने फांदी दीवारें
जामिया मिलिया इस्लामिया में JMISU की बहाली को लेकर भारी तनाव। पुलिस बल की तैनाती के बीच छात्रों ने कैंपस की दीवारें फांदीं।

देश की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी इस समय भारी तनाव के केंद्र में है। कैंपस में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती और कड़े लॉकडाउन के बावजूद, प्रदर्शनकारी छात्र यूनिवर्सिटी के गेटों की दीवारें फांदकर अंदर दाखिल हुए और विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। कैंपस के अंदर दिल्ली पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ (CRPF), आईटीबीपी (ITBP) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टुकड़ियों को तैनात किया गया है, जिससे पूरा माहौल किसी किले जैसा नजर आ रहा है।
यह पूरा विवाद जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) की बहाली की मांग को लेकर शुरू हुआ है। बता दें कि यह यूनियन साल 2006 से निष्क्रिय है। छात्रों ने 12 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसके बाद हालात बिगड़ते चले गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी फिजिकल क्लासेज सस्पेंड कर दी हैं और पानी की सप्लाई तक काट दी है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए लाइब्रेरी बंद कर दी गई है और सभी शैक्षणिक गतिविधियां ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट कर दी गई हैं।
राजनीतिक हस्तक्षेप और एफआईआर का मामला
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस पूरे बवाल के पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया है। रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने कांग्रेस सांसदों इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद, साथ ही समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नादवी पर छात्रों को भड़काने और उन्हें राजनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। प्रशासन की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने इन तीनों सांसदों के खिलाफ अनधिकृत प्रवेश और अशांति फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है।
वहीं दूसरी ओर, एसएफआई (SFI) और आइसा (AISA) जैसे छात्र संगठनों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रजिस्ट्रार और सुरक्षा सलाहकार ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को जबरन हटाया और महिला छात्राओं के साथ बदसलूकी की। हंगामे के बीच यूनिवर्सिटी ने अपने 106वें स्थापना दिवस 'तालिमी मेला' को भी रद्द कर दिया है, जो 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित होना था।
इस बीच, कैंपस की दीवारों पर "फ्री कश्मीर" और "फ्री शरजील इमाम" जैसे नारे लिखे जाने से विवाद और गहरा गया है। जहां कांग्रेस सांसद मोहम्मद जवेद ने प्रशासन को बल प्रयोग के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दी है, वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि वे JMISU के नए संविधान पर काम कर रहे हैं। फिलहाल, कैंपस में तनाव बरकरार है और छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।