जामिया में ऑनलाइन क्लास के फैसले पर बवाल, छात्रों ने लगाया दमन का आरोप

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने ऑनलाइन क्लास के फैसले का विरोध किया है, इसे यूनियन की मांग दबाने की साजिश बताया।

Kittu Kumari25 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जामिया में ऑनलाइन क्लास के फैसले पर बवाल, छात्रों ने लगाया दमन का आरोप

जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) कैंपस में माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अचानक सभी कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने और कैंपस की मुख्य सुविधाओं को बंद करने के फैसले के खिलाफ छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को बड़ी संख्या में छात्रों ने इस निर्णय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन का दावा है कि यह कदम छात्रों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे अपनी आवाज दबाने की एक सोची-समझी साजिश मान रहे हैं।

दरअसल, रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी द्वारा जारी एक नोटिस में कहा गया कि मौजूदा अशांति के बीच सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया है। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि प्रशासन असल में उन्हें कैंपस से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। छात्र मोहम्मद अयान खान ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि ऑनलाइन क्लासेस का सहारा केवल एक 'ट्रिक' है ताकि कैंपस को खाली कराया जा सके। छात्रों की मुख्य मांग जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) की बहाली है, जो मार्च 2006 से भंग है। इसके अलावा, कैंपस में बढ़ते भ्रष्टाचार और बुलिंग के मुद्दे भी इस विरोध प्रदर्शन की बड़ी वजह बने हुए हैं।

भूख हड़ताल और कैंपस में टकराव

यह विवाद काफी गहरा चुका है। 12 अक्टूबर 2026 से ही पांच छात्र—एबिन बेसिल, मोहम्मद जसीम खान, रेहान हैदर, रेहान पवार और फैजान अली खान—अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। शनिवार को स्थिति तब और बिगड़ गई जब सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच विरोध प्रदर्शन वाले टेंट हटाने को लेकर झड़प हुई। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) का कहना है कि प्रशासन बातचीत के बजाय बल प्रयोग कर रहा है ताकि छात्रों के असंतोष को खत्म किया जा सके।

इस पूरे हंगामे के बीच विश्वविद्यालय ने अपने 106वें स्थापना दिवस के जश्न को रद्द कर दिया है। हालांकि, कुलपति मज़हर आसिफ और रजिस्ट्रार ने 1,500 से अधिक कर्मचारियों के समर्थन से कैंपस में शांति की अपील की है। प्रशासन का तर्क है कि बिना किसी औपचारिक संविधान और चुनावी तंत्र के अभी चुनाव कराना जल्दबाजी होगी। हालांकि, एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है जो JMISU के संविधान का मसौदा तैयार करेगी और 12 अक्टूबर के बाद छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा करेगी। इसके बावजूद, छात्र कैंपस में डटे हुए हैं, जबकि लाइब्रेरी, कैंटीन और मुख्य द्वारों तक उनकी पहुंच सीमित कर दी गई है।

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