जामिया मिलिया इस्लामिया में तोड़फोड़: कांग्रेस सांसदों समेत कई लोगों पर FIR दर्ज
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़ मामले में कांग्रेस सांसदों समेत कई लोगों पर FIR दर्ज की गई है।

राजधानी दिल्ली की मशहूर यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया एक बार फिर विवादों और तनाव के केंद्र में है। यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में दर्ज FIR में न केवल प्रदर्शनकारियों, बल्कि कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी के नाम भी शामिल हैं, जिन पर कैंपस में अनधिकृत प्रवेश और unrest (अशांति) भड़काने का आरोप लगाया गया है।
घटना 28 अक्टूबर 2026 की रात की है, जब कैंपस में तनाव अचानक बढ़ गया। बताया जा रहा है कि छात्रों ने यूनिवर्सिटी की संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया और लड़कों के हॉस्टल व आसपास के इलाकों में जमकर तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारी जबरन उन हिस्सों में घुस गए जहाँ उनका जाना प्रतिबंधित था। यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक, कई डिपार्टमेंटल कमरों के ताले तोड़ दिए गए और यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को नष्ट कर दिया गया।
छात्रों की मांग और प्रशासन की सख्ती
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से छात्र संघ चुनावों की बहाली की मांग को लेकर शुरू हुआ था। हालांकि, प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि यूनियन के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही, छात्रों पर लगाए गए पिछले निलंबन और कारण बताओ नोटिस भी वापस ले लिए गए थे। इसके बावजूद स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
प्रशासन ने 26 अक्टूबर को ही एक अंतिम नोटिस जारी कर प्रदर्शनकारियों को गुलिस्तां-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन खाली करने का आदेश दिया था और चेतावनी दी थी कि नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। रजिस्ट्रार मोहम्मद मेहताब आलम रिज़वी की औपचारिक शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी के आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है, जिससे यह पूरा क्षेत्र हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में बदल गया है। कैंपस में जारी तनाव और सुरक्षा कारणों की वजह से यूनिवर्सिटी ने फिलहाल अपनी सभी शैक्षणिक कक्षाओं को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट कर दिया है।