जामिया मिलिया इस्लामिया में 18 दिन की भूख हड़ताल खत्म, 20 साल बाद लौटेंगे छात्र संघ चुनाव
जामिया मिलिया इस्लामिया में 18 दिनों की भूख हड़ताल के बाद प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव कराने पर सहमति जताई है। जानें पूरा समझौता।

दिल्ली की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में कैंपस के भीतर लोकतंत्र की बहाली की मांग कर रहे छात्रों की लंबी लड़ाई आखिरकार रंग लाई है। करीब 18 दिनों तक चली भूख हड़ताल के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्र नेताओं के बीच एक अहम समझौता हुआ है, जिसके तहत अब कैंपस में छात्र संघ चुनाव दोबारा आयोजित किए जाएंगे। यह फैसला इसलिए खास है क्योंकि साल 2006 में छात्र संघ भंग होने के बाद से करीब दो दशकों तक यूनिवर्सिटी में चुनाव नहीं हुए थे।
समझौते की मुख्य बातें और चुनाव की समयसीमा
प्रशासन के साथ हुए इस समझौते के मुताबिक, छात्र संघ के लिए एक संविधान तैयार किया जाएगा, जिसे 15 मई 2027 तक अंतिम रूप देकर मंजूरी दे दी जाएगी। इस काम के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें छात्रों के प्रतिनिधि, फैकल्टी सदस्य और कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराए जाएंगे, जिसका मतलब है कि अगस्त 2027 के अंत तक छात्र अपने प्रतिनिधियों को चुन सकेंगे।
इस विवाद को सुलझाने में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के राज्यसभा सांसद हारिस बीरन ने अहम मध्यस्थता निभाई। उनकी मौजूदगी में छात्र नेता एबिन, जासिम खान, फैजान हैदर और रेहान ने यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार महताब आलम रिजवी के साथ बातचीत की।
छात्रों की जीत केवल चुनावों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासन ने आंदोलन के दौरान की गई सभी दंडात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने का फैसला किया है। इसमें शो-कॉज नोटिस, निलंबन (suspension), रस्टिकेशन ऑर्डर और कैंपस बैन शामिल हैं। साथ ही, विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए भी एक कमेटी गठित की जाएगी।
वहीं, आपसी सहमति के तौर पर छात्र प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के खिलाफ दिए गए किसी भी अपमानजनक बयान के लिए सार्वजनिक माफी मांगने और सोशल मीडिया से संबंधित कंटेंट हटाने का वादा किया है। यूनिवर्सिटी ने अब उन छात्रों को 8 नवंबर तक कैंपस लौटने का निर्देश दिया है, जो विरोध के दौरान बाहर चले गए थे, ताकि ऑफलाइन कक्षाएं और परीक्षाएं सुचारू रूप से शुरू हो सकें।