जामिया मिलिया इस्लामिया में बवाल: छात्र संघ की मांग पर प्रदर्शन तेज, 2 सांसदों समेत 10 हिरासत में
जामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज, कांग्रेस और सपा सांसद समेत 10 लोग हिरासत में लिए गए।

दिल्ली की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। कैंपस में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए 10 लोगों को हिरासत में ले लिया। हैरानी की बात यह है कि हिरासत में लिए गए लोगों में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नादवी भी शामिल थे। हालांकि, बाद में दोनों सांसदों को रिहा कर दिया गया, लेकिन इस घटना ने कैंपस के माहौल को गरमा दिया है।
यह पूरा मामला 12 अक्टूबर से शुरू हुआ था, जब छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। अब यह आंदोलन 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है। छात्रों की मुख्य मांग है कि साल 2006 से भंग पड़े जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को फिर से बहाल किया जाए और चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा हो। इसके अलावा, प्रदर्शनकारी चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे और उन छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जिन्हें इस विरोध प्रदर्शन के कारण सस्पेंड किया गया है या जिन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
कैंपस में सुरक्षा और प्रशासन की कार्रवाई
छात्र संगठनों, विशेषकर AISA के सौरभ त्रिपाठी ने प्रशासन पर कैंपस के 'सैन्यीकरण' का आरोप लगाया है। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि गेट नंबर 7 और 10 के पास चल रहा निर्माण कार्य केवल सुरक्षा और मरम्मत के लिए है, इसका विरोध प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं है। यूनिवर्सिटी की चीफ पीआरओ साइमा सईद ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता किया जा रहा है।
तनाव के बीच कैंपस की दीवारों पर "फ्री कश्मीर" और "वीसी गो बैक" जैसे विवादित नारे लिखे जाने की खबरें आई हैं। प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कर दी है, जबकि छात्र नेता जासिम अली खान का दावा है कि ये नारे आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहर से लगवाए गए हैं।
इस मुद्दे पर अब राजनीतिक दबाव भी बढ़ता दिख रहा है। सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कैंपस में निर्वाचित छात्र निकाय की कमी पर चिंता जताई है। इसके साथ ही NSUI, AISA और JNUSU जैसे संगठनों ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है। फिलहाल, कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी की देखरेख में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और छात्रों के लिए आईडी चेक अनिवार्य कर दिया गया है।