जामिया मिलिया इस्लामिया कैंपस में तनाव: तोड़फोड़ के आरोप और छात्र संघ की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली को लेकर तनाव बढ़ा। प्रशासन ने तोड़फोड़ का आरोप लगाया, जबकि छात्रों ने प्रस्ताव ठुकराया।

देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। कैंपस में बीते कुछ दिनों से जारी छात्र विरोध प्रदर्शन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आरोप लगाया है कि रात के समय कैंपस में तोड़फोड़ की गई, जिसमें गेट नंबर 4C और केंद्रीय मस्जिद के गेट के पास संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। प्रशासन ने कुछ वीडियो फुटेज भी साझा किए हैं जिनमें लोग गेट फांदते और नारेबाजी करते दिख रहे हैं। हालांकि, हैरान करने वाली बात यह है कि दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस तोड़फोड़ को लेकर यूनिवर्सिटी की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
छात्र संघ की बहाली और प्रशासन के बीच टकराव
यह पूरा विवाद जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) की बहाली को लेकर है। गौरतलब है कि साल 2005-2006 के बाद से यहां छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। करीब 16 दिनों से चल रहे इस आंदोलन में SFI, NSUI, AISA और JNUSU जैसे संगठन शामिल हैं। छात्रों की मांग है कि छात्र संघ को तुरंत बहाल किया जाए और चीफ प्रॉक्टर इस्तीफा दें।
मामले को सुलझाने के लिए रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें कहा गया था कि संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। प्रशासन ने निलंबित छात्रों के आदेश वापस लेने और सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच करने का वादा भी किया। लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। छात्रों का कहना है कि संविधान की मंजूरी के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी गई है, और वे प्रशासन की मांग के अनुसार सार्वजनिक माफी मांगने को तैयार नहीं हैं।
तनाव इतना बढ़ गया है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 8 नवंबर तक सभी क्लास ऑनलाइन कर दी हैं। कैंपस के मुख्य गेट सील कर दिए गए हैं और लाइब्रेरी व कैंटीन जैसी सुविधाएं बंद कर दी गई हैं। कुलपति मज़हर आसिफ और अन्य अधिकारियों का कहना है कि ये कदम केवल सुरक्षा के लिए उठाए गए हैं।
इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्रों से अपील की है कि वे कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगाड़ें और बातचीत के जरिए समाधान निकालें। बता दें कि इससे पहले 17 अक्टूबर को भूख हड़ताल कर रहे तीन छात्रों के साथ सुरक्षाकर्मियों और पुलिस द्वारा बदसलूकी के आरोप लगे थे, जिसके बाद प्रदर्शन और उग्र हो गया।