जामिया मिलिया इस्लामिया में ऑनलाइन क्लासेस शुरू, हिंसक प्रदर्शनों के बाद कैंपस बंद
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद कैंपस बंद कर ऑनलाइन क्लासेस शुरू की गई हैं।

दिल्ली की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। कैंपस में बढ़ते बवाल और हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। 24 अक्टूबर 2026 से यूनिवर्सिटी के सभी शैक्षणिक कामकाज को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट कर दिया गया है। इतना ही नहीं, सुरक्षा कारणों से कैंपस को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिसमें लाइब्रेरी और कैंटीन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ 12 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई एक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल है। मोहम्मद जासिम खान, एबिन बेसिल, रेहान हैदर, रेहान खान और फैजान अली खान जैसे छात्रों ने साल 2006 से निष्क्रिय पड़े 'जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन' (JMISU) को फिर से बहाल करने की मांग उठाई थी। मामला तब और बिगड़ गया जब 17 अक्टूबर को सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को जबरन हटाया, जिसके बाद कई छात्रों को सस्पेंड और रस्टिकेट कर दिया गया।
प्रशासन और छात्रों के बीच टकराव बढ़ा
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए 18 अक्टूबर को एक उच्च स्तरीय समिति और 21 अक्टूबर को यूनियन के लिए संवैधानिक मसौदा समिति का गठन किया था, लेकिन बातचीत के तमाम प्रयास नाकाम रहे। तनाव इतना बढ़ गया कि 23 अक्टूबर को सुरक्षा कारणों से वार्षिक 'तालिमी मेला' रद्द करना पड़ा। 24 अक्टूबर को जब यूनिवर्सिटी गार्ड्स ने विरोध प्रदर्शन के टेंट हटाने की कोशिश की, तो छात्रों ने मानव श्रृंखला बनाकर इसका विरोध किया और अपना धरना पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट में शिफ्ट कर लिया।
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रोफेसर एमडी महताब आलम रिज़वी ने कहा कि यह कदम छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है। वहीं, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढी और इमरान मसूद पर छात्रों को उकसाने का आरोप लगाया गया है। प्रशासन ने कैंपस की दीवारों पर लिखे 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' जैसे नारों की भी कड़ी निंदा की है, जिसे यूनिवर्सिटी की छवि खराब करने की कोशिश बताया गया है।
इस आंदोलन में AISA, SFI, यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ जामिया, AIDSO, AIRSO, DISHA, DISSC, फ्रेटरनिटी मूवमेंट, MSF और SIO जैसे कई छात्र संगठन शामिल हैं। इसके अलावा कांग्रेस सांसद मोहम्मद जवैद और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुललाह नादवी जैसे राजनीतिक दिग्गजों ने भी इस मामले में अपनी दिलचस्पी दिखाई है।