जामिया मिलिया इस्लामिया की दीवारों पर विवादित स्लोगन, यूनिवर्सिटी ने मिटाए नारे
जामिया मिलिया इस्लामिया कैंपस में विवादित स्लोगन लिखे जाने और छात्रों के भूख हड़ताल के बीच तनाव बढ़ा। यूनिवर्सिटी ने कार्यक्रम रद्द किए।

दिल्ली की मशहूर यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया इन दिनों भारी तनाव के बीच है। कैंपस की दीवारों पर नीले और लाल रंगों से लिखे गए विवादित स्लोगन ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। 22 अक्टूबर 2026 को कैंपस में "फ्री कश्मीर" और "फ्री शरजील इमाम" जैसे नारे लिखे पाए गए। इसके साथ ही इन दीवारों पर आरएसएस (RSS), एबीवीपी (ABVP) और यूनिवर्सिटी के कुलपति (VC) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां भी की गई थीं। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए इन सभी नारों को मिटवा दिया है, लेकिन मामला अब गरमा गया है।
एबीवीपी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि जिन लोगों ने यह हरकत की है, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कैंपस में छात्र पहले से ही अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्रों की भूख हड़ताल और यूनिवर्सिटी का रुख
कैंपस में 'यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ जामिया' के बैनर तले कई छात्र संगठन जैसे SFI, AISA और MSF आदि मिलकर प्रदर्शन कर रहे हैं। 12 अक्टूबर से शुरू हुई यह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 23 अक्टूबर तक 11वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। छात्रों की मुख्य मांग 2006 में भंग किए गए जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को फिर से बहाल करना और 2026-27 सत्र के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान करना है। इसके अलावा, वे चीफ प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।
प्रशासन ने इस विवाद को सुलझाने के लिए कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ के नेतृत्व में सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई थी, ताकि अनुशासन संबंधी उपायों और JMISU के संविधान का मसौदा तैयार किया जा सके। लेकिन छात्रों ने यूनिवर्सिटी के इन कदमों को केवल समय बर्बाद करने की रणनीति और धमकी करार देते हुए खारिज कर दिया है। डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर निलोफर अफ़ज़ल ने स्वीकार किया है कि बातचीत के बावजूद छात्र समाधानों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और कैंपस में अभी तक सामान्य स्थिति नहीं लौटी है।
तनाव इतना बढ़ गया है कि यूनिवर्सिटी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपना 106वां स्थापना दिवस समारोह और 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होने वाले वार्षिक "तालिमी मेला 2026" को रद्द कर दिया है। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों की तबीयत भी बिगड़ रही है और प्रशासन द्वारा कुछ छात्रों को निलंबित भी किया गया है।